जबलपुर। मध्यप्रदेश में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन की लापरवाही अब मासूमों की जान पर भारी पड़ने लगी है। गुरुवार सुबह जबलपुर जिले के पाटन क्षेत्र में 6 वर्षीय कविता पर दो आवारा कुत्तों ने बुरी तरह हमला कर दिया। मासूम गंभीर रूप से घायल है और जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

सुबह 7 बजे घटी वारदात

पाटन की साहू कॉलोनी में रहने वाली कविता सुबह करीब 7 बजे पास की किराना दुकान पर साबुन लेने गई थी। घर लौटते समय अचानक दो स्ट्रीट डॉग्स उस पर टूट पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब 2 से 3 मिनट तक कुत्ते बच्ची को गिराकर नोचते रहे। बच्ची दर्द से चीखती रही लेकिन तब तक कोई आसपास नहीं था।

राहगीरों ने जब यह दृश्य देखा तो पत्थर और डंडे मारकर कुत्तों को भगाया। बावजूद इसके, एक कुत्ता घर तक उसका पीछा करता हुआ अंदर घुस आया, जिसे स्थानीय लोगों ने मिलकर बाहर निकाला।

सिर, हाथ और पैर पर गहरे घाव

कविता के सिर, हाथ, पैर और कंधे पर 5–6 जगह गहरे जख्म हैं। खून से लथपथ हालत में उसे पहले पाटन स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बच्ची की मां अहिल्याबाई ने बताया कि बच्ची अब भी इतनी सहमी हुई है कि बोल भी नहीं पा रही।

गरीब परिवार पर टूटा दुख

कविता का परिवार मूल रूप से डिंडोरी जिले का है। मां अहिल्याबाई छह महीने पहले पाटन में किराए के मकान में रहने आई थीं और मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करती हैं। पिता नागपुर में मजदूरी करते हैं। घटना की सूचना मिलते ही उन्हें भी खबर दी गई। मकान मालिक धनीराम ने कहा कि अगर राहगीर समय पर न आते तो बच्ची की जान तक जा सकती थी।

बढ़ता कुत्तों का आतंक, प्रशासन पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि पाटन और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई बार नगर परिषद से शिकायत के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। अब मासूम बच्ची पर हुए इस हमले से प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं

इलाज जारी, लोग सहमे

फिलहाल कविता मेडिकल कॉलेज में भर्ती है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। मोहल्ले के लोग सदमे में हैं और आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी और मासूम की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि शहरों में बढ़ते स्ट्रीट डॉग्स पर नियंत्रण और टीकाकरण की व्यवस्था को मजबूत करना अब अनिवार्य हो गया है।