जबलपुर/चरगवां। जबलपुर ज़िले के चरगवां क्षेत्र में स्थित सिद्धपुरी गांव के लोगों को आज़ादी के 75 साल बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिली है, जिसकी वजह से उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल ले जाने के लिए चारपाई का सहारा लेना पड़ा। यह घटना गांव में सड़क के अभाव के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति को दर्शाती है।


 

एंबुलेंस की राह बंद, कच्ची सड़क बनी मौत का डर

 

25 वर्षीय बरसा बाई ठाकुर को प्रसव पीड़ा होने पर उनके परिवार ने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन एंबुलेंस नुनपुर रोड पर बड़ी नहर के पास पुलिया से आगे नहीं जा सकी। पुलिया के बाद करीब दो किलोमीटर तक कच्चा और अधूरा रास्ता है, जिसके कारण वाहन का आगे बढ़ना नामुमकिन था। मजबूरी में महिला के परिवारजनों और गांववालों ने उन्हें चारपाई पर उठाकर पगडंडियों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए अस्पताल तक पहुंचाया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि वर्षों से उन्हें ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।


 

अधूरे वादे और नेताओं की बेरुखी

 

ग्रामीण नन्हेंलाल ठाकुर ने बताया कि छपरा गांव के पास नाले किनारे सड़क का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन काम बीच में ही रोक दिया गया। उन्होंने नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय तो वे सड़क बनाने के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद इन वादों को भूल जाते हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पिछले पंचवर्षीय कार्यकाल में भी इस समस्या को हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।


 

रोज़मर्रा की चुनौतियाँ: स्कूल से लेकर अस्पताल तक

 

सिद्धपुरी गांव में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए सड़क की कमी हर दिन की चुनौती बन गई है।

  • बच्चों की पढ़ाई में बाधा: स्कूल जाने वाले बच्चों को भी कच्चे और खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है।

  • किसानों को दिक्कत: किसानों को अपने खेतों और खलिहानों तक पहुंचने में भारी कठिनाई होती है।

  • बीमारों के लिए खतरा: सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब किसी बीमार या घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाने की ज़रूरत होती है। इस गांव में दोपहिया या चारपहिया वाहन का आना लगभग नामुमकिन है।


 

"सड़क का अभाव, ज़िंदगी और मौत के बीच का फर्क"

 

एक ग्रामीण ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क की कमी अब सिर्फ असुविधा का मुद्दा नहीं रही, बल्कि यह उनके जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस मामले में, स्थानीय पंचायत और प्रशासन की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे ग्रामीणों में और भी आक्रोश है।