पिता की डांट बनी मौत की वजह: माढ़ोताल में बेटे ने की प्रवचनकर्ता की बेरहमी से हत्या
जबलपुर, शहर के माढ़ोताल थाना क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक जघन्य वारदात सामने आई है। सिख संगत से जुड़े एक प्रसिद्ध प्रवचनकर्ता अजीत सिंह (50 वर्ष) की उनके ही बेटे अमरजीत सिंह ने बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को शहर से भागने की कोशिश करते हुए रेलवे स्टेशन पर धर दबोचा। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी ने पिता की लगातार डांट-फटकार से तंग आकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।
हथौड़े और धारदार हथियार से किया वार
माढ़ोताल थाना प्रभारी नीलेश दोहरे ने बताया कि रविवार सुबह उन्हें अजीत सिंह के घर से सूचना मिली कि उनका शव खून से लथपथ एक बंद कमरे में पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने घटनास्थल का गहन मुआयना किया। घर के भीतर की स्थिति और बिखरे हुए सामान ने पुलिस को इस ओर इशारा किया कि यह हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि घर के ही किसी सदस्य ने की है। अजीत सिंह का बड़ा बेटा पुणे में रहता है, जबकि अमरजीत अपने पिता के साथ ही रहता था। पुलिस को पता चला कि वारदात के बाद से अमरजीत लापता था, जिससे उस पर शक गहरा गया।
पुलिस ने तुरंत अमरजीत का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाया। उसकी आखिरी लोकेशन रेलवे स्टेशन के पास मिली। पुलिस की एक टीम ने बिना देर किए स्टेशन पर छापा मारा और अमरजीत को उस वक्त पकड़ लिया, जब वह शहर छोड़कर भागने की तैयारी में था।
बचपन में माँ को खोया, पिता की डांट से था परेशान
पुलिस पूछताछ में 25 वर्षीय अमरजीत ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसकी माँ का निधन बचपन में ही हो गया था, और तब से वह अकेला अपने पिता के साथ रह रहा था। अमरजीत का कहना था कि उसके पिता हर बात पर उसे डांटते-फटकारते थे, जिससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो चुका था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे।
वारदात की रात भी पिता-पुत्र के बीच बहस हुई। गुस्से से बौखलाए अमरजीत ने पहले एक हथौड़े से अजीत सिंह के सिर पर कई वार किए। जब पिता बेसुध होकर गिर गए, तो अमरजीत ने घर में रखे एक धारदार हथियार से उनका गला रेत दिया। हत्या को अंजाम देने के बाद, उसने शव को कमरे में ही छोड़ दिया और फरार हो गया।पुलिस ने बताया कि उन्होंने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उससे आगे की पूछताछ जारी है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव किस हद तक एक व्यक्ति को अपराध करने के लिए मजबूर कर सकता है।
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