भारतीय किसान संघ का पूरे प्रदेश में प्रदर्शन, जबलपुर में ट्रैक्टर रैली; मुख्यमंत्री ने दिया संवाद का आश्वासन
जबलपुर, भारतीय किसान संघ (बीकेएस) के नेतृत्व में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को पूरे प्रदेश में आंदोलन किया। इसके तहत प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे गए। जबलपुर में, किसानों ने कृषि उपज मंडी से एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली और घंटाघर पहुंचकर अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।
जबलपुर में ट्रैक्टर रैली और सुरक्षा व्यवस्था
दोपहर 12 बजे, बड़ी संख्या में किसान जबलपुर की कृषि उपज मंडी में एकत्रित हुए। यहां एक सभा के बाद, ट्रैक्टर रैली मंडी से शुरू हुई और दमोह नाका, रानीताल, यातायात चौक, तीन पत्ती चौक और नौदरा ब्रिज से होते हुए घंटाघर पहुंची। रैली को देखते हुए पुलिस ने घंटाघर क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी थी और बैरिकेडिंग लगाई गई थी। रैली के अंत में, किसान अपनी मांगों का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपेंगे।
टीकमगढ़ में भी किसानों का प्रदर्शन
जबलपुर की तरह, टीकमगढ़ में भी किसानों ने अपनी मांगों को लेकर दोपहर 1 बजे से रैली निकालना शुरू कर दिया था। यह आंदोलन पूरे प्रदेश में किसानों की एकजुटता को दर्शाता है।
किसानों की प्रमुख मांगें
बीकेएस ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं:
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लैंड पूलिंग एक्ट को तत्काल वापस लिया जाए।
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यूरिया और डीएपी सहित खाद की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
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खाद-बीज की कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
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धान, गेहूं, मूंग और उड़द का रुका हुआ भुगतान तुरंत किया जाए।
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गेहूं और धान की न्यूनतम खरीद दरें बढ़ाई जाएं, जिसमें गेहूं के लिए ₹2700 और धान के लिए ₹3100 प्रति क्विंटल की मांग की गई है।
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जिले में तीन साल से अधिक समय से पदस्थ कृषि विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों का तबादला किया जाए और उन पर कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री का बयान: "सभी से संवाद कर हित की सोचें"
अमर उजाला से बातचीत के दौरान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान संघ के विरोध पर प्रतिक्रिया दी। लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "हमारा भाव है कि हम सबसे संवाद करते हुए सबके हित की बात सोच कर चलें। हमारा प्रयास है कि हम विकास के क्रम को बनाए रखें और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ें। हमें लगातार हमारे विकास के कामों का सबका समर्थन मिलता है, उसी भाव से हम चल रहे हैं।" मुख्यमंत्री का यह बयान सरकार की ओर से किसानों के साथ संवाद और उनकी चिंताओं पर ध्यान देने का संकेत देता है।
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