उमरिया, जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय से सूचना का अधिकार (RTI) से संबंधित पटल गायब है। यह विभाग पर एक नया 'कारनामा' करने का आरोप है, जिससे लोगों को RTI के तहत जानकारी प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। आरोप है कि यह कदम भ्रष्टाचार की जानकारी को छिपाने के लिए उठाया गया है।

विभाग पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जनजातीय कार्य विभाग ने जानबूझकर RTI, प्रथम अपील और अपीलीय सूचना अधिकार के पटल को हटा दिया है। न तो किसी दीवार पर और न ही किसी बोर्ड या बैनर पर इसकी जानकारी दी गई है। यह जिले का एकमात्र ऐसा सरकारी कार्यालय है जहां इस तरह की स्थिति है, जबकि अन्य सभी विभागों में RTI से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होती है।

आलोचकों का कहना है कि विभाग ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि लोग भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी न मांग सकें और RTI आवेदन प्रक्रिया में भ्रमित रहें। यह सीधे तौर पर नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन है, जो पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इस घटना ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह जांच का विषय बन गया है कि आखिर क्यों इस महत्वपूर्ण जानकारी को सार्वजनिक प्रदर्शन से हटाया गया है।