जबलपुर के बिट्ठलनाथ आश्रम में सवा दो फीट लंबा अजगर निकलने से हड़कंप, सर्प विशेषज्ञ ने किया रेस्क्यू
जबलपुर, शहर के गढ़ा थानांतर्गत देवताल सरोवर के समीप स्थित गुंसाई बिट्ठलनाथ आश्रम में सोमवार सुबह उस समय अफरातफरी मच गई, जब वहां एक सवा दो फीट लंबा विशालकाय अजगर निकल आया। यह घटना आश्रम के शांत माहौल को अचानक भय और उत्सुकता में बदल गई। इस अजगर ने एक गिलहरी के बच्चे को अपना निवाला बनाया, जिसके बाद यह लोगों की नजर में आया।
गिलहरी का शिकार कर मिट्टी में छिपा था अजगर
सोमवार की सुबह करीब 7 बजे, जब आश्रम में लोग अपने दैनिक कार्यों में लगे थे, तभी उन्होंने एक विशाल सांप को देखा। यह इंडियन रॉक पाइथन प्रजाति का अजगर था, जिसने हाल ही में एक गिलहरी के बच्चे को शिकार बनाकर निगला था। शिकार के बाद, अजगर आश्रम में रखी गीली मिट्टी की एक खोह में छिप गया। इस अप्रत्याशित घटना से वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और वे दहशत में आ गए। आश्रम के पुजारी पंडित सुरेंद्र शर्मा ने स्थिति की गंभीरता को समझा और बिना समय गवाए तुरंत सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे को सूचना दी। दुबे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अजगर को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी शुरू कर दी।
अजगर था गैर-विषैला, पर पकड़ थी बेहद मजबूत
सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे ने बताया कि पकड़ा गया सांप इंडियन रॉक पाइथन (प्दकपंद त्वबा च्लजीवद) है। उन्होंने बताया कि इस प्रजाति के अजगर जहरीले नहीं होते हैं, लेकिन इनकी पकड़ इतनी मजबूत होती है कि यह अपने शिकार का दम घोंटकर उसे मार देते हैं। दुबे ने यह भी बताया कि इस तरह के अजगर अक्सर चट्टानों की सतहों या दरदरी जमीन के पास पाए जाते हैं और इनकी लंबाई 10 से 12 फीट तक हो सकती है। उन्होंने लोगों को यह भी जानकारी दी कि जब तक इन सांपों को छेड़ा न जाए, तब तक वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे ने अपनी टीम के साथ मिलकर सावधानीपूर्वक अजगर को रेस्क्यू किया और उसे एक विशेष बोरे में बंद कर दिया। अजगर को पकड़े जाने के बाद, उसे पास के घने जंगल में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया, जहां वह अपने प्राकृतिक आवास में रह सके। अजगर के पकड़े जाने के बाद, आश्रम के सभी लोगों ने राहत की सांस ली और स्थिति सामान्य हो गई।
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