जबलपुर, - सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की सख्त कार्रवाई जारी है। , जबलपुर लोकायुक्त इकाई ने एक महत्वपूर्ण अभियान में कार्यालय असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं में कार्यरत एक महिला कर्मचारी को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। यह कार्रवाई उस समय की गई जब आरोपी एक संस्था के रजिस्ट्रेशन के बदले रिश्वत की मांग कर रही थी।

 

क्या है पूरा मामला?

 

कटनी जिले के ग्राम कौड़िया निवासी शिवप्रसाद कुशवाहा ने जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि वे अपनी "परमलोक धाम आश्रम सेवा समिति" का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए कार्यालय असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, जबलपुर संभाग में गए थे। इस प्रक्रिया के लिए, कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 प्रीति ठाकुर द्वारा उनसे 5,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी। आवेदक के अनुसार, प्रीति ठाकुर बिना रिश्वत लिए उनका काम करने को तैयार नहीं थीं।

शिकायत मिलने के बाद, लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन किया और पाया कि रिश्वत की मांग सही थी। इसके बाद, पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख के निर्देश पर एक ट्रेप की योजना बनाई गई।

 

रंगे हाथों पकड़ी गई आरोपी

15 सितंबर,  को, जब आवेदक शिवप्रसाद कुशवाहा तय योजना के अनुसार रिश्वत की राशि लेकर आरोपी प्रीति ठाकुर के पास पहुंचे, तो लोकायुक्त की टीम ने उन्हें दबोच लिया। जैसे ही आरोपी ने 5,000 रुपये की रिश्वत ली, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।यह ट्रेप कार्रवाई उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती नीतू त्रिपाठी के नेतृत्व में की गई, जिसमें निरीक्षक रेखा प्रजापति, निरीक्षक बी.एस. नरवरिया, और लोकायुक्त जबलपुर के अन्य सदस्य शामिल थे।लोकायुक्त टीम ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) 2018 की धारा-7, 13(1)B, और 13(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता की उम्मीद जगी है और भ्रष्ट अधिकारियों को एक कड़ा संदेश मिला है।