इंदौर सड़क हादसे पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक रुख: पुलिस कमिश्नर को किया तलब, 'नो एंट्री' पर मांगा जवाब
जबलपुर, : मध्य प्रदेश के इंदौर में हाल ही में हुए भीषण और दर्दनाक सड़क हादसे पर प्रदेश हाई कोर्ट ने अभूतपूर्व गंभीरता दिखाई है। इस हादसे में कई लोगों की जान जाने के बाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले में सीधे दखल दिया है। कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने सीधे तौर पर इंदौर के पुलिस कमिश्नर को तलब करते हुए उनसे सख्त जवाब-तलब किया है। यह कदम प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ न्यायिक सक्रियता का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
हादसा और हाई कोर्ट की नाराजगी
शहर में हुई इस दुर्घटना में एक अनियंत्रित भारी ट्रक ने कई लोगों को कुचल दिया था, जिससे मौके पर ही कई मौतें हो गईं और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इस हादसे ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अखबारों में छपी खबरों के आधार पर ही इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया। सुनवाई के दौरान, जस्टिस सचदेवा ने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब सड़क सुरक्षा के सख्त नियम मौजूद हैं, तो इस तरह के हादसे होना बेहद चिंताजनक है।
शहर में कैसे घुसा ट्रक? 'नो एंट्री' नियम पर तीखे सवाल
हाई कोर्ट ने इस मामले की जड़ तक जाने की कोशिश की है। कोर्ट ने सवाल उठाया है कि इंदौर शहर में दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर ‘नो एंट्री’ का नियम लागू है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि यह ट्रक शहर के भीतर कैसे घुसा और बिना किसी रोक-टोक के इतने आगे तक कैसे पहुंच गया? कोर्ट ने इसे कानून-व्यवस्था और प्रशासन की बड़ी विफलता माना है। अदालत ने कहा कि अगर नियमों का कड़ाई से पालन हुआ होता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।
पुलिस कमिश्नर को नोटिस, 23 सितंबर को अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने इस गंभीर लापरवाही को लेकर इंदौर पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे पूछा गया है कि इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई में वर्चुअली हाजिर होकर अदालत के समक्ष अपना विस्तृत जवाब पेश करें। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की गई है। हाई कोर्ट की यह सख्त कार्रवाई दर्शाती है कि आम जनता की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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