जबलपुर,  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सेवा सहकारी समिति पड़रिया तहसील कुण्डम के एक सेल्समैन संजय कुमार विश्वकर्मा के निलंबन को रद्द कर दिया है, जिसे एक साल से अधिक समय से निलंबित रखा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेवा नियमों के तहत निलंबन की अधिकतम अवधि एक साल ही हो सकती है।

क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता को 8 मई, 2024 को सेल्समैन के पद से निलंबित कर दिया गया था और उसे सोसायटी कार्यालय से जोड़ दिया गया था। उसने इस निलंबन आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि 'प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों पर लागू सेवा विनियमों' के खंड-32 के अनुसार, निलंबन की सामान्य अवधि तीन महीने होती है, जिसे निदेशक मंडल की मंजूरी से बढ़ाया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में यह एक साल से ज्यादा नहीं हो सकती। चूंकि याचिकाकर्ता का निलंबन एक साल से अधिक हो चुका था, इसलिए यह निलंबन कानूनी रूप से गलत है। वकील ने इसी तरह के एक अन्य मामले में हाई कोर्ट की समन्वय पीठ द्वारा दिए गए फैसले का भी हवाला दिया।

अदालत का फैसला
राज्य के वकील ने भी सेवा नियमों के इस प्रावधान पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इस पर, न्यायमूर्ति विवेक जैन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मामला पूरी तरह से कानूनी है और इसमें कोई तथ्यात्मक विवाद नहीं है।अदालत ने कहा कि सेवा विनियमों के खंड-32 के अनुसार, निलंबन आदेश अपनी अवधि पूरी कर चुका है। इसलिए, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।इसके साथ ही, कोर्ट ने प्रतिवादी नंबर 5 और 6 को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि अगर याचिकाकर्ता को निलंबन अवधि के दौरान निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) नहीं दिया गया है, तो इसका भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए।इन निर्देशों के साथ, याचिका स्वीकार कर ली गई है और याचिकाकर्ता को तुरंत उसके पद पर वापस लेने की अनुमति दे दी गई है।