कांग्रेस में 'संगठन सृजन' पर उठे सवाल: निष्कासित नेता को मिली अल्पसंख्यक कमेटी अध्यक्ष की कुर्सी, कार्यकर्ताओं में भारी रोष
जबलपुर। मध्य प्रदेश में कांग्रेस का "संगठन सृजन अभियान" अब पार्टी के भीतर ही सवालों के घेरे में आ गया है। जबलपुर में हुई नियुक्तियों पर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं ने गंभीर आपत्ति जताई है, खासकर तब जब एक ऐसे नेता को अल्पसंख्यक कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया गया, जिसे पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित किया गया था। इस फैसले ने अनुशासन, पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं की अनदेखी को लेकर पार्टी में एक नई बहस छेड़ दी है।
अनुशासन को दरकिनार कर दिया बड़ा पद
यह पूरा मामला अशरफ मंसूरी की नियुक्ति से जुड़ा है। मंसूरी को हाल ही में अल्पसंख्यक कांग्रेस कमेटी, जबलपुर का अध्यक्ष बनाया गया है। कांग्रेस के जाकिर हुसैन ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आजम अली खान ने इस नियुक्ति पर सीधे पार्टी आलाकमान को चिट्ठी लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर की है। चिट्ठी में उन्होंने बताया है कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद, अशरफ मंसूरी ने, जो उस समय आईटी सेल और सोशल मीडिया अध्यक्ष थे, सीधे तौर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ पर आपत्तिजनक पोस्ट की थी। इस गंभीर अनुशासनहीनता के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
आजम अली खान का आरोप है कि पार्टी में वर्षों से काम कर रहे निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर एक ऐसे व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद दिया गया है, जिसने खुलेआम पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर टिप्पणी की थी। इस कदम से कार्यकर्ताओं में यह संदेश जा रहा है कि पार्टी में अनुशासन का कोई महत्व नहीं है और जो लोग पार्टी लाइन से हटकर काम करते हैं, उन्हें भी बाद में पुरस्कृत किया जा सकता है।
रायशुमारी के नियम का उल्लंघन
आजम अली खान ने अपनी चिट्ठी में "संगठन सृजन अभियान" की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। इस अभियान के तहत यह नियम बनाया गया था कि नई नियुक्तियों से पहले कार्यकर्ताओं के बीच रायशुमारी की जाएगी, ताकि जमीनी स्तर से सहमति बन सके। लेकिन अशरफ मंसूरी की नियुक्ति में इस नियम का पालन नहीं किया गया।खान ने आरोप लगाया कि यह नियुक्ति गुपचुप तरीके से, बंद कमरे में हुई है। कार्यकर्ताओं को इस फैसले की कोई खबर नहीं थी और न ही उनसे कोई राय ली गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके इशारे पर रायशुमारी के नियम को तोड़ा गया? इस तरह के फैसले पार्टी के भीतर गुटबाजी को बढ़ावा देते हैं और समर्पित कार्यकर्ताओं को हाशिए पर धकेलते हैं, जिससे वे पार्टी से दूरी बनाने को मजबूर हो सकते हैं एक तरफ जहां कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ फैसलों से उसके अपने ही कार्यकर्ता असंतुष्ट हो रहे हैं। यह स्थिति आने वाले समय में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
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