जबलपुर। वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मियों का गुस्सा आज सड़कों पर उतर आया। तीन महीने से बकाया वेतन के लिए संघर्ष कर रहे रांझी के सफाई कर्मचारियों ने एक अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन करते हुए अंबेडकर वार्ड (वार्ड क्र. 62) के पार्षद के घर के सामने कचरे का बड़ा ढेर लगा दिया। यह प्रदर्शन यहीं नहीं रुका, कर्मचारियों ने मस्ताना चौक और दर्शन सिंह तिराहे जैसे प्रमुख स्थानों पर भी कचरा फैलाकर अपना रोष जाहिर किया। इस विरोध ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया और आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।


 

वेतन न मिलने से घर चलाना मुश्किल

 

युवा कांग्रेस नेता डॉ. अंशुल बर्मन (अभिमन्यु) ने इस विरोध प्रदर्शन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सफाईकर्मियों को पिछले तीन महीनों से उनका वेतन नहीं मिला है। इस वजह से उन्हें न सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण करने में बल्कि आने वाले त्योहारों के लिए भी तैयारी करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन उनकी शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया गया। जब धैर्य का बांध टूट गया, तो उनके पास विरोध का यह अनोखा तरीका अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।


 

आम जनता और व्यापारियों में आक्रोश

सफाईकर्मियों के इस प्रदर्शन से रांझी के कई हिस्सों में गंदगी का अंबार लग गया। सड़कों पर कचरा फैलने से ट्रैफिक जाम हो गया और पैदल चलने वालों को भी दिक्कतें आईं। स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में इस स्थिति को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि सफाई कर्मचारियों की समस्या जायज है, लेकिन इस तरह से विरोध प्रदर्शन करने से आम जनता को बेवजह परेशानी हो रही है। इस घटना के बाद इलाके में काफी देर तक गहमा-गहमी का माहौल बना रहा और लोगों ने जल्द से जल्द स्थिति को सामान्य करने की मांग की।


 

युवा कांग्रेस ने दिया अल्टीमेटम

युवा कांग्रेस ने इस मामले में सफाईकर्मियों का समर्थन करते हुए नगर निगम पर दबाव बढ़ा दिया है। डॉ. बर्मन ने नगर निगम जोन कार्यालय क्र. 10 के अधिकारियों से मुलाकात कर जल्द से जल्द सफाई कर्मचारियों का बकाया वेतन जारी करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो युवा कांग्रेस सफाईकर्मियों के साथ मिलकर नगर निगम रांझी का घेराव करेगी और एक बड़ा और उग्र आंदोलन करेगी। इस घटना ने एक बार फिर से नगर निगम की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के प्रति उसकी उदासीनता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।