मेडिकल में साढ़े तीन साल के नन्हें मरीज को नई जिंदगी, कैंसर-सिकल का चौथा सफल ऑपरेशन
न्यूरोंब्लास्टोमा, सिकल सेल पर बड़ी जीत
जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अस्पताल के बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग ने लगातार चौथी बार न्यूरोब्लास्टोमा ऑटोलॉगस (हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट) की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया है. इसके साथ ही, एक सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चा भी पूरी तरह से ठीक होकर अपने गृह नगर लौटने के लिए तैयार है, जो लगभग ढाई महीने पहले भर्ती हुआ था.
कैंसर से जंगः एक छोटे बच्चे को मिली नई ज़िंदगी
हाल ही में, एम्स भोपाल से रेफर किए गए साढ़े तीन साल के एक बच्चे को मेटास्टैटिक न्यूरोब्लास्टोमा के इलाज के लिए यहाँ लाया गया था. इस बच्चे का सफल ऑटोलॉगस करने के लिए उसकी स्टेम सेल सफलतापूर्वक एकत्र की गई. यह प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण थी, खासकर इतने छोटे बच्चे में कैथेटर लगाना. इसके लिए, डॉ. नरेंद्र पटेल ने विशेष रूप से समय निकालकर यह महत्वपूर्ण काम किया, जिसकी बदौलत पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो पाई. इस सफलता ने न केवल बच्चे के परिवार में उम्मीद जगाई है, बल्कि यह मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा क्षमताओं का भी प्रमाण है।
सिकल सेल पर जीतः ढाई महीने के इलाज के बाद घर वापसी
न्यूरोब्लास्टोमा के अलावा, मेडिकल कॉलेज की टीम ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है. सिकल सेल से पीड़ित एक बच्चा, जो लगभग ढाई महीने पहले यहाँ भर्ती हुआ था, अब पूरी तरह से ठीक हो चुका है. बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद, बच्चे में पूर्ण डोनर काइमेरिज्म पाया गया है, जिसका मतलब है कि डोनर की स्टेम कोशिकाएं अब उसके शरीर में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं. यह बच्चा जल्द ही अपने परिवार के साथ घर वापस जाएगा.
सामूहिक प्रयास का नतीजाः पूरी टीम को धन्यवाद
इस संबंध में डॉक्टर श्वेता पाठक ने बताया कि इस असाधारण उपलब्धि का श्रेय मेडिकल कॉलेज के पूरे स्टाफ और प्रशासनिक टीम को जाता है. इस मौके पर, टीम ने डीन अधीक्षक , एचओडी डॉक्टर मोनिका मैम डॉक्टर मीना को उनके प्रशासनिक सहयोग के लिए धन्यवाद दिया. साथ ही, उन्होंने सीनियर रेज़िडेंट, लैब टेक्नीशियन, नर्सों और विशेष रूप से बीएमटी टीम के सभी सदस्यों (डॉ. विद्या, राजेश जैन सर, महोबिया सर और पूरी टीम) की सराहना की, जिनकी दिन-रात की मेहनत और लगन से यह संभव हो पाया है.। यह सफलता दर्शाती है कि जबलपुर का मेडिकल कॉलेज अब गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है, जिससे न केवल स्थानीय बल्कि आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएँ मिल रही हैं.
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