आरडीयू कर्मचारी संघ में दो फाड़: हड़ताल के दौरान आपस में भिड़े कर्मचारी, एक गुट ने आंदोलन वापस लिया
जबलपुर, - रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) में पिछले कुछ दिनों से चल रही कर्मचारियों की हड़ताल में आज एक नाटकीय मोड़ आया। कर्मचारी संघ दो गुटों में बंट गया, जिसके बाद एक गुट ने हड़ताल वापस ले ली, जबकि दूसरा गुट अभी भी अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। इस दौरान, हड़ताल स्थल पर कर्मचारियों के बीच जमकर विवाद और हाथापाई भी हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
क्यों आई हड़ताल में फूट?
कर्मचारी संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह पटेल ने कुलसचिव को लिखित में जानकारी देते हुए बताया कि वे 23 सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ हुई बैठक की जानकारी सभी कर्मचारियों को देना चाहते थे। इस बैठक में प्रेम पुरोहित, राजेंद्र शुक्ला और वीरेंद्र तिवारी जैसे वरिष्ठ सदस्य भी शामिल थे। हालांकि, उनका आरोप है कि जब वे जानकारी साझा करने पहुँचे, तो कुछ कर्मचारी शराब के नशे में वहाँ आए और गाली-गलौज करने लगे। पटेल ने अपने पत्र में लिखा, ष्संघ विरोधी कर्मचारियों द्वारा वरिष्ठ कर्मचारियों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज की गई, जिससे संघ अपनी बात कर्मचारियों को नहीं बता सका। इस स्थिति से कर्मचारियों के बीच विवाद पैदा हुआ, जिससे शांतिपूर्ण हड़ताल में बाधा उत्पन्न हुई।ष् इस व्यवहार को ष्अशोभनीयष् बताते हुए उन्होंने अध्यक्ष की हैसियत से हड़ताल को तत्काल स्थगित करने का फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि संघ अब प्रशासन के सहयोग से अपनी मांगों को पूरा करने की कोशिश करेगा।
शराब पीकर हंगामा और मारपीट का आरोप
संघ के सदस्य राम सिंह ठाकुर ने भी कुलसचिव को एक अलग पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि वे 8 सितंबर से चल रही हड़ताल का समर्थन कर रहे थे, लेकिन 23 सितंबर के बाद हड़ताल की दिशा बदल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आंदोलन में ष्बाहरी लोगोंष् का हस्तक्षेप बढ़ गया और कुछ कर्मचारी शराब के नशे में ष्ना बोलने वाली भाषाष् का इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जब वे 23 सितंबर की चर्चा के बारे में कर्मचारियों से बात कर रहे थे, तो कुछ नशे में धुत कर्मचारियों ने विवाद शुरू कर दिया और मारपीट जैसी स्थिति पैदा कर दी। उन्होंने इस व्यवहार को ष्औचित्यहीनष् बताते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय और कर्मचारियों के हित में नहीं है। इसी तरह, रविशंकर तिवारी ने भी लिखित में शिकायत की कि जब वे 24 सितंबर को हड़ताल में शामिल थे और प्रशासन से हुई चर्चा की जानकारी ले रहे थे, तो मनीष पाण्डेय नामक कर्मचारी ने अचानक गाली-गलौज और बहस करना शुरू कर दिया। तिवारी ने भी इस घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि हड़ताल की दिशा बदल दी गई है। उन्होंने भी तत्काल काम पर लौटने का फैसला किया।
प्रशासन की कार्रवाई और आगे की स्थिति
कर्मचारी संघ में इस फूट और हाथापाई के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नज़र रखी हुई है। यह घटना दर्शाती है कि कर्मचारियों के बीच एकता की कमी है, जिसका सीधा असर उनके आंदोलन की सफलता पर पड़ रहा है। फिलहाल, हड़ताल से हटे हुए कर्मचारी काम पर लौट आए हैं, जबकि दूसरा गुट अभी भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे हुए है। इस घटना ने विश्वविद्यालय में एक गंभीर स्थिति पैदा कर दी है, जहाँ कर्मचारियों के आपसी मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं।
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