जबलपुर। जिन घरों में कल तक बच्चों की खिलखिलाहट और शैतानियां गूंज रही थीं, आज वहां सिर्फ गहरा सन्नाटा और मातम पसरा है। बरगी हिल्स में करंट लगने से दो मासूम बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। आज जब 8 वर्षीय आयुष झारिया और 10 वर्षीय वेद श्रीवास की अर्थियां एक साथ उठीं, तो हर आंख नम थी और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। नवरात्रि के उत्सव पर हर जगह देवी की आराधना हो रही है, लेकिन इस गांव में त्योहार की रौनक की जगह सिर्फ दर्द और मातम की गूंज सुनाई दे रही है। यह दिल दहला देने वाली घटना बुधवार शाम तब हुई जब दोनों बच्चे दुर्गा पूजा पंडाल में आयोजित आरती में शामिल होने जा रहे थे। पंडाल के बाहर सजावट के लिए लगाए गए लोहे के खंभों में अचानक करंट फैल गया। बताया जाता है कि पंडाल समिति द्वारा बिजली की झालरों के लिए जो वायरिंग की गई थी, उसमें लापरवाही बरती गई थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। दोनों बच्चे गलती से करंट वाले खंभे के संपर्क में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों का सदमा
घटना के प्रत्यक्षदर्शी अभी भी गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि आंखों के सामने हंसते-खेलते बच्चों को बिजली के झटके से तड़पते देखना एक ऐसा भयानक मंजर था, जिसे भुला पाना असंभव है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, ष्हमने तुरंत बच्चों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उस रात कोई भी चौन से सो नहीं पाया।ष् यह घटना एक बार फिर से सार्वजनिक स्थानों पर बिजली की व्यवस्था में बरती जाने वाली घोर लापरवाही को उजागर करती है।

प्रशासन की कार्रवाई और मुआवजे की घोषणा
इस दुखद घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। जिला कलेक्टर ने मामले की गहन जांच के लिए एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी हादसे के कारणों का पता लगाएगी और दोषियों की जवाबदेही तय करेगी। स्थानीय पुलिस ने भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इधर, मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, ष्इस दुख की घड़ी में हम पीड़ित परिवारों के साथ हैं।ष् मंत्री ने मृतकों के परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। स्थानीय लोगों और परिजनों ने पंडाल समिति और बिजली विभाग की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की है। उनका आरोप है कि नियमों का पालन न होने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ है। इस घटना ने पूरे प्रदेश में दुर्गा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। यह हादसा सिर्फ दो मासूमों की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और अनदेखी का भी परिणाम है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया है।