जबलपुर में अधिवक्ताओं की क्रमिक भूख हड़ताल शुरू, प्रशासन की अनदेखी से बढ़ा रोष
जबलपुर, जिला अधिवक्ता संघ के नेतृत्व में आज से जबलपुर में अधिवक्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। यह कदम कई सालों से चली आ रही समस्याओं के समाधान में हो रही देरी और प्रशासन की कथित अनदेखी के विरोध में उठाया गया है।
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा के नेतृत्व में अधिवक्तागण आज सुबह 11 बजे जिला एवं सत्र न्यायालय के गेट नंबर 4 के बाहर अनशन पर बैठ गए। अधिवक्ताओं का कहना है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है, जिससे उन्हें और उनके मुवक्किलों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने कहा कि प्रशासन द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि यह शांतिपूर्ण अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती। इस भूख हड़ताल से न्यायालय के कामकाज पर असर पड़ सकता है, और अधिवक्ताओं में व्याप्त असंतोष अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है।
अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें और समस्याएं:
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लंबित लिफ्टों का सुधार: जिला अधिवक्ता संघ भवन में लगी चार में से तीन लिफ्टें खराब हैं। एक लिफ्ट पिछले एक साल से बंद पड़ी है, जबकि एक मात्र चालू लिफ्ट भी अक्सर रुक जाती है, जिससे अधिवक्ताओं और पक्षकारों को परेशानी होती है। प्रशासन द्वारा लिफ्टों की मरम्मत के लिए 42 लाख रुपये से अधिक की राशि और सुधार कार्य के लिए 4.83 लाख रुपये की राशि आवंटित किए जाने के बावजूद, तीन महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी काम शुरू नहीं हुआ है।
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खुले क्षेत्र में डोम का निर्माण: जिला अधिवक्ता संघ भवन में G-1, G-2, और G-3 के सामने का खुला स्थान बारिश में जलभराव का कारण बनता है, जिससे अधिवक्ताओं और पक्षकारों को फिसलने और आने-जाने में दिक्कत होती है। संघ ने इस स्थान पर डोम लगाने की मांग की थी, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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शौचालयों की बदहाली: नई अधिवक्ता बिल्डिंग में बने शौचालयों में पानी की निकासी की व्यवस्था खराब है, जिससे गंदगी बनी रहती है और उनका उपयोग करना मुश्किल है। यहां तक कि बेसमेंट में पार्किंग क्षेत्र में भी पानी भर जाता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इन शौचालयों का पूरी तरह से नए सिरे से निर्माण आवश्यक है ताकि बीमारियों से बचा जा सके।
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महिला अधिवक्ताओं के लिए सुविधाओं का अभाव: लगभग 500 से 600 महिला अधिवक्ता नियमित रूप से काम करती हैं, लेकिन उनके लिए कोई अलग से बैठने की व्यवस्था या आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। संघ ने कैंटीन/कॉफी हाउस और महिला कक्ष के निर्माण की मांग की थी, जिसके लिए पूर्व में कई न्यायाधीशों ने निरीक्षण भी किया था और अनुमति देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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बिल्डिंग की मरम्मत और पुताई: लगभग सात साल से न्यायालय भवन की पुताई नहीं हुई है, जिससे भवन पुराना और जर्जर दिखाई दे रहा है। इसके अलावा, निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का काम भी लंबे समय से रुका हुआ है, जिसकी राशि भी स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन शासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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