जबलपुर।  मध्य प्रदेश के ऊर्जामंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने बुधवार को जबलपुर स्थित बिजली कंपनी के मुख्यालय शक्ति भवन पहुंचकर स्मार्ट मीटर योजना पर चल रहे विवादों और कांग्रेस के आरोपों पर स्पष्ट और कड़ा जवाब दिया। मंत्री तोमर ने दावा किया कि यह योजना उपभोक्ताओं के हित में है और इससे मिल रहे लाभ के आंकड़े भी पेश किए।

स्मार्ट मीटर पर विसंगति के आरोप श्निराधारश्
ऊर्जामंत्री ने साफ किया कि स्मार्ट मीटर में किसी भी प्रकार की कोई विसंगति नहीं है, जैसा कि आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह तकनीक उपभोक्ताओं को सशक्त बना रही है। इसके फायदे बताते हुए उन्होंने कहा, ष्स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता अपनी रियल टाइम बिजली खपत जान सकता है, जिससे वह अपनी बिजली की उपयोगिता का प्रबंधन बेहतर तरीके से कर सकता है।ष् उन्होंने यह भी घोषणा की कि उपभोक्ताओं के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए स्मार्ट मीटर एप की जल्द ही समीक्षा की जाएगी।

7 लाख उपभोक्ताओं को 7 करोड़ का लाभ
मंत्री तोमर ने स्मार्ट मीटर के लाभ का आंकड़ा देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्मार्ट मीटर से जुड़े 7 लाख उपभोक्ताओं को सिर्फ एक माह में ही ₹7 करोड़ रुपये के बिल में छूट मिली है। मंत्री ने कहा कि यह छूट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यह मीटरिंग प्रणाली न केवल पारदर्शी है, बल्कि उपभोक्ताओं को बचत करने में भी मदद कर रही है।

समयसीमा वृद्धि का कारणरू उपलब्धता में कमी, कांग्रेस की जीत नहीं
स्मार्ट मीटर लगाने की समयसीमा को साल 2028 तक बढ़ाने के सरकार के फैसले पर भी ऊर्जामंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि यह वृद्धि उपभोक्ताओं के दबाव या किसी विरोध के कारण नहीं, बल्कि स्मार्ट मीटर की उपलब्धता कम होने के कारण की गई है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित और त्रुटिहीन मीटरिंग सुनिश्चित करने के लिए यह समयसीमा बढ़ाई गई है।उन्होंने समयसीमा बढ़ने को कांग्रेस द्वारा अपनी जीत बताने वाले बयानों पर भी पलटवार किया। तोमर ने कहा, ष्कांग्रेस अब विरोध कर रही है, जबकि यह प्रक्रिया पहले से ही जारी थी। कांग्रेस के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। ऊर्जामंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने अंत में जोर देकर कहा कि ये स्मार्ट मीटर श्मेक इन इंडियाश् पहल के तहत बनाए जा रहे हैं और यह तकनीक प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।