जबलपुर में बवाल: 4 महीने से वेतन न मिलने पर सफाईकर्मियों ने सड़कों पर फैलाया कचरा; मंगलवार तक भुगतान न होने पर नगर निगम में 'तालाबंदी' की चेतावनी
जबलपुर, : नगर निगम प्रशासन की घोर लापरवाही के खिलाफ रोष जताते हुए रांझी क्षेत्र के ठेका सफाई कर्मचारियों ने बुधवार को एक उग्र और अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। पिछले चार महीनों से वेतन न मिलने से नाराज इन कर्मचारियों ने अपनी बदहाली और गुस्से को व्यक्त करने के लिए दर्शन सिंह तिराहे पर सड़कों पर कचरा फैलाकर प्रदर्शन किया, जिससे शहर की व्यवस्था चरमरा गई।
आक्रोशित कर्मचारियों ने ट्रैफिक रोका, लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी सफाईकर्मी बड़ी संख्या में दर्शन सिंह तिराहे पर जमा हुए और उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए निगम प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। उनके इस आकस्मिक धरना प्रदर्शन के कारण यह व्यस्त तिराहा पूरी तरह से जाम हो गया।
सड़कों पर कचरा फैलने और यातायात बाधित होने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सफाई कर्मचारियों ने स्पष्ट आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में विफल रहा है और जानबूझकर वेतन भुगतान में देरी कर रहा है, जिससे उनकी और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है।
एमआईसी सदस्य और अधिकारियों ने दिया 'जल्द भुगतान' का आश्वासन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, नगर निगम के उच्च अधिकारी और एमआईसी सदस्य (महापौर परिषद सदस्य) तत्काल प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे। उन्होंने कर्मचारियों को शांत करने और प्रदर्शन समाप्त कराने के उद्देश्य से हस्तक्षेप किया।
अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनके बकाये वेतन का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाएगा। हालांकि, कर्मचारियों का गुस्सा चार महीने की अनदेखी के कारण इतना बढ़ चुका था कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए।
निगम प्रशासन को 'अल्टीमेटम': मंगलवार तक वेतन या 'तालाबंदी'
भले ही अधिकारियों ने भुगतान का वादा किया, लेकिन सफाई कर्मचारियों ने अपनी चेतावनी को बरकरार रखते हुए निगम प्रशासन को अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है। कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए साफ किया है कि:
"यदि हमारा बकाया चार महीने का वेतन मंगलवार, (आगामी तिथि) तक जारी नहीं किया जाता है, तो हम अगले कदम के तौर पर शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह ठप करके नगर निगम मुख्यालय में अनिश्चितकालीन 'तालाबंदी' करेंगे।"
वेतन न मिलने के कारण ठेका कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में यह कड़ा और असाधारण कदम उठाना पड़ा है। यह घटना नगर निगम के ठेका प्रबंधन और भुगतान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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