JABALPUR NEWS: ब्रेस्ट कैंसर ने तोड़ी उम्र की सीमा: मंडला की युवती को 18 साल में फुटबॉल जैसा ट्यूमर
विशेषज्ञ बोले- जागरूकता का अभाव चिंताजनक
जबलपुर/: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य जागरूकता और जीवनशैली में आ रहे बदलावों के बीच एक अत्यंत चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है। मंडला जिले की महज़ 18 वर्ष की एक युवती को ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) से जूझना पड़ रहा है, जिसने न सिर्फ परिजनों को बल्कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज (जबलपुर) के अनुभवी चिकित्सकों को भी हैरान कर दिया है। युवती को इलाज के लिए जबलपुर मेडिकल अस्पताल लाया गया है, जहाँ सोमवार को उसकी जटिल सर्जरी की जाएगी।
कम उम्र में कैंसर: जागरूकता की कमी बनी गंभीर समस्या
बीमारी का पता तब चला जब परेशानी बढ़ने पर युवती को चिकित्सकीय परामर्श लेना पड़ा। मंडला जैसे आदिवासी बाहुल्य और छोटे जिले में इस कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर की खबर ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। युवती को इलाज के लिए जबलपुर के प्रतिष्ठित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल लाया गया।
फुटबॉल के आकार का विशाल ट्यूमर
मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में ब्रेस्ट ऑन्कोसर्जन डॉ. संजय कुमार यादव ने मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इतनी कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर के मामले अभी भी विरले हैं, लेकिन युवती का इतने गंभीर स्थिति में सामने आना चिंताजनक है। डॉ. यादव के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से जागरूकता के अभाव को दर्शाता है, जिससे उपचार का क्रम बिगड़ता है।डॉ. यादव ने खुलासा किया कि युवती इलाज के लिए फुटबॉल के आकार के ट्यूमर के साथ आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्तन में किसी भी तरह के ट्यूमर को शुरुआती चरण में ही महसूस कर समुचित उपचार शुरू कर देना चाहिए, ताकि बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके।
असफल सर्जरी के बाद अब 'जीवन रक्षक' सर्जरी की चुनौती
इस केस की जटिलता एक और तथ्य से बढ़ गई है। डॉ. यादव ने बताया कि इस युवती की कहीं और पहले एक असफल सर्जरी हुई है। इस कारण, अब ट्यूमर को पूरी तरह निकालने और युवती की जान बचाने के लिए दोबारा सर्जरी करनी पड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर पूर्व में सर्जरी न हुई होती, तो पहले कीमोथेरेपी देकर ट्यूमर का आकार छोटा किया जाता और फिर सर्जरी की जाती, लेकिन अब सीधे सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है।
युवाओं में ब्रेस्ट कैंसर का बढ़ता खतरा
यह मामला भारत में युवा महिलाओं के बीच ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते खतरे की ओर भी ध्यान दिलाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, अस्वस्थ खान-पान, मोटापा, तनाव और पर्यावरणीय कारक कम उम्र में कैंसर के मामलों को बढ़ा रहे हैं। जबलपुर मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में भी अब 25 से 35 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में स्तन कैंसर के शुरुआती चरण के लक्षण मिलने की खबरें आई हैं। ऐसे में, मंडला की इस 18 वर्षीय युवती का मामला देश भर में महिलाओं, खासकर युवा लड़कियों के लिए, स्वयं जांच (Self-Examination) और नियमित चिकित्सकीय परामर्श की अनिवार्यता पर जोर देता है। फिलहाल, मेडिकल अस्पताल के चिकित्सक सोमवार को होने वाली सर्जरी की तैयारियों में जुटे हैं और उन्हें युवती को इस जानलेवा बीमारी से निजात दिलाने का पूरा भरोसा है।
हरी खाद- खेती में बढ़ेगा उत्पादन, मिट्टी की सेहत होगी बेहतर
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कवर्धा की बेटी रिया केशरवानी को दी बधाई, दसवीं बोर्ड में प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल किया
खंडवा के डायल-112 हीरोज
सामाजिक सुरक्षा पेंशन इस विश्वास का अंतरण है कि सरकार हर घड़ी जरूरतमंदों के साथ है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सशक्त नारी, समृद्ध परिवार : महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिल रहा आत्मनिर्भरता का संबल
पशु सखियों के प्रशिक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
दतिया पुलिस की बड़ी सफलता
मसाला फसलों के उत्पादन में हम अव्वल, उद्यानिकी फसलों के रकबे का करें विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
बद्रीनाथ धाम में चमत्कार! माता-पिता को 5 साल बाद मिला बेटा