जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश के चिकित्सा जगत में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टर्स और फार्मा कंपनियों के बीच वर्षों से चले आ रहे गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबलपुर के तीन अत्यंत प्रतिष्ठित डॉक्टर्स— डॉ. विजय चावला, डॉ. नरेश कुमार बंसल और डॉ. अजय भंडारी— की ईमानदारी पर उंगली उठी है। इन चिकित्सकों पर आरोप है कि उन्होंने यूएसवी लिमिटेड (USV Limited) नामक एक दवा कंपनी की दवाएं लगातार प्रिस्क्राइब करने के एवज में विदेश यात्रा (फॉरेन टूर) का लाभ लिया है।

MPMC ने जारी किए नोटिस, 15 दिन में मांगा जवाब

इस गंभीर आरोप के बाद मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल (MPMC) ने इन तीनों डॉक्टर्स सहित प्रदेश भर के 14 जिलों के लगभग 20 डॉक्टर्स को नोटिस जारी किया है। नोटिस में चिकित्सकों से उनकी विदेश यात्राओं, बैंक डिटेल्स और यात्रा टिकटों का ब्यौरा तलब किया गया है, ताकि आरोपों की सत्यता जांची जा सके। सूत्रों के अनुसार, काउंसिल ने डॉक्टर्स को 15 दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।

मामले की जड़: 2015 की शिकायत और कोर्ट का हस्तक्षेप

यह पूरा मामला लगभग एक दशक पुराना बताया जा रहा है।व्हिसल ब्लोअर की शिकायत: सबसे पहले यह मुद्दा वर्ष 2015 में रायपुर के व्हिसल ब्लोअर और सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने उठाया था। तिवारी ने 28 अगस्त 2015 को मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

  1. सबूतों के साथ दावा: शिकायतकर्ता ने मजबूत सबूतों के साथ दावा किया था कि मध्य प्रदेश के 20 प्राइवेट डॉक्टर्स 13 जुलाई से 21 जुलाई, 2014 तक इटली के वेनिस और पोर्टोरोज जैसे महंगे पर्यटन स्थलों की यात्रा पर गए थे, जिसका पूरा खर्च फार्मा कंपनी ने उठाया था। इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के भी 23 डॉक्टर्स शामिल थे।

  2. औपचारिकता तक सीमित थी कार्रवाई: शिकायत के बावजूद, MPMC पर आरोप है कि वह वर्षों तक इस मामले में औपचारिकता निभाते हुए शांत बैठा रहा और कोई ठोस वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई।

  3. हाईकोर्ट का दखल: काउंसिल की धीमी गति को देखते हुए विकास तिवारी ने आखिरकार कोर्ट का रुख किया। बताया जा रहा है कि वर्तमान में MPMC ने यह कार्रवाई अपने स्वविवेक से नहीं, बल्कि हाईकोर्ट में दायर एक याचिका के तहत मिले निर्देशों के बाद की है।

'कमीशनखोरी' के गंभीर आरोप

आरोपों में यह बात सामने आई है कि ये डॉक्टर्स सालों साल से केवल एक ही दवा कंपनी की दवाएं लिख रहे थे और बदले में नकद मोटी रकम या विदेश भ्रमण जैसे महंगे तोहफे बतौर 'कमीशन' ले रहे थे। यह सीधे तौर पर चिकित्सा नैतिकता और देश के कानून का उल्लंघन है, जो डॉक्टर्स और फार्मा कंपनियों के बीच इस तरह के अनुचित गठजोड़ को प्रतिबंधित करता है।

जबलपुर में छाया सन्नाटा

जबलपुर के चिकित्सा जगत में यह खबर आग की तरह फैल गई है, लेकिन तीनों प्रतिष्ठित डॉक्टर्स या उनसे जुड़े संगठन इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।अब सभी की निगाहें MPMC और हाईकोर्ट पर टिकी हैं कि क्या इस बार यह 'औपचारिकता' से आगे बढ़कर कोई कठोर और निर्णायक कार्रवाई होगी, जिससे भविष्य में डॉक्टर्स और दवा कंपनियों के बीच अनैतिक संबंधों पर लगाम लग सके।