जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर शहर की लगातार घटती एयर कनेक्टिविटी के मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को बेहद तल्ख़ टिप्पणी की। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की युगलपीठ ने इस 'सौतेले व्यवहार' पर नाराजगी व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को कई कड़े निर्देश दिए हैं।कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी: "क्यों न ज्यूडिशियल ऑर्डर से चलवाये फ्लाईट्स?"
सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने जबलपुर एयरपोर्ट (डुमना) के विस्तार पर खर्च किए गए लगभग ₹500 करोड़ के बावजूद, फ्लाइट्स की संख्या घटने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि:"क्यों न ज्यूडिशियल ऑर्डर से ही फ्लाईट्स चलवा दी जाएं?""क्यों न भोपाल और इंदौर एयरपोर्ट की कुछ फ्लाइट्स जबलपुर ट्रांसफर कर दी जाएं?""हम यहां सब कुछ शिफ्ट कर देंगे, तब कनेक्टिविटी अपने आप सुधर जाएगी!"यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि कोर्ट जबलपुर को एयर कनेक्टिविटी के मामले में अन्य शहरों की तुलना में पीछे धकेलने पर सरकार और एयरलाइंस के रवैये से कितना असंतुष्ट है।केंद्र सरकार को सीधा आदेश: तुरंत करें 'स्टेकहोल्डर मीटिंग'हाई कोर्ट ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल को तत्काल प्रभाव से एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है:विमान कंपनियों के साथ मीटिंग: जबलपुर से फ्लाइट्स की संख्या बढ़ाने और रूट को वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य (Commercially Viable) बनाने के लिए सभी विमानन कंपनियों के साथ एक तत्काल मीटिंग आयोजित की जाए।राज्य सरकार और याचिकाकर्ता को शामिल करें: इस मीटिंग में राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों (जैसे उड्डयन विभाग) और याचिकाकर्ता (नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच) को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।कोर्ट का यह आदेश सुनिश्चित करेगा कि केंद्र, राज्य और एयरलाइंस एक साझा मंच पर आकर जबलपुर की एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए ठोस योजना बनाएं।

याचिका में क्या कहा गया था?

जबलपुर में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने की मांग को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा यह जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में बताया गया कि ₹500 करोड़ खर्च कर एयरपोर्ट के विस्तार के बावजूद, यहां से फ्लाइट्स की संख्या 15 से घटकर 9 या उससे भी कम रह गई है, जबकि तुलनात्मक रूप से छोटे एयरपोर्ट जैसे भोपाल और इंदौर से प्रतिदिन 40 से 80 से अधिक उड़ानें संचालित हो रही हैं।
हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 6 नवंबर की तारीख तय की है और स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।