मुख्य अभियंता कांति लाल वर्मा का मामला ED पहुंचा: प्राइवेट कंपनी खोलने, टेंडर और उपकेंद्र घोटाले के आरोप!
जबलपुर। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य अभियंता कांति लाल वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के सनसनीखेज आरोपों की कंपनी द्वारा जांच ना किए जाने पर शिकायतकर्ता ने अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से न्याय की गुहार लगाई है। मुख्य अभियंता कांति लाल वर्मा के कथित भ्रष्टाचारों का पुलिंदा ईडी को सौंप दिया गया है। शिकायतकर्ता पंडित शिवांश त्रिपाठी ने मांग की है कि चूंकि श्री वर्मा जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, इसलिए उनके रिटायरमेंट से पहले इन गंभीर आरोपों की जांच पूरी की जानी चाहिए।
इन आरोपों में घिरे हैं चीफ इंजीनियर कांति लाल वर्मा:
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ईको सिटी और मेगा सिटी कॉलोनियों के विद्युतीकरण स्वीकृति में भ्रष्टाचार: आरोप है कि इसमें ₹5 करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ था। अनुभव चतुर्वेदी की शिकायत पर सीएम जांच हुई थी। शिकायत में कहा गया है कि तत्कालीन मुख्य प्रबंधक नीता राठौर ने जांच को दबा दिया और छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। आरोप है कि वर्मा ने डेवलपर से सांठगांठ कर अनुचित लाभ दिया और 33-11केवी उपकेंद्र को खुर्द-बुर्द करके कंपनी को ₹5 करोड़ की क्षति पहुंचाई।
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लोकायुक्त जांच और उसी रीजन में पोस्टिंग: छिंदवाड़ा में पदस्थ रहते हुए जबलपुर लोकायुक्त टीम ने उनके निवास पर छापा मारा था और एक मामला दर्ज किया गया था, हालांकि बाद में सबमिट रिपोर्ट को निरस्त कर दिया गया था। लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज होने के बावजूद, उन्हें उसी जबलपुर रीजन में पोस्टिंग दी गई।
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निजी तौर पर दो प्राइवेट कंपनियां खोलना: उन पर नौकरी में रहते हुए कंपनी के नियमों का उल्लंघन कर दो निजी कंपनियां खोलने का आरोप है:
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इनेफा स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड, पूना
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एस3ए इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रे्क्ट प्राइवेट लिमिटेड, गाजियाबाद
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इन कंपनियों की डायरेक्टर सरिता वर्मा को बनाया गया। आरोप है कि कंपनी के नियमानुसार कोई अनुमति नहीं ली गई और ये कंपनियां वर्ष 2017-18 से लगातार काम कर रही हैं।
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छतरपुर में शिवोहम कंस्ट्र्क्शन कंपनी खोलना और नियम विरुद्ध काम: छतरपुर में बिना अनुमति के 'शिवोहम कंस्ट्र्क्शन कंपनी' खोलने और इस कंपनी से सागर रीजन में नियम विरुद्ध ट्रांसफार्मर लगाने का भी आरोप है। शिकायत के बाद तत्कालीन मुख्य अभियंता (सतर्कता) पीके क्षत्रीय ने जांच में सैकड़ों ट्रांसफार्मर निकालने की बात कही थी।
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सिविल रेनोवेशन टेंडर में अनियमितता: कुछ माह पहले मुख्य अभियंता कार्यालय के सिविल रेनोवेशन के नाम पर एक करोड़ का टेंडर अपने चहेते ठेकेदार को देने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि ठेके पर सिर्फ रंगाई-पुताई का काम हुआ और शेष राशि की बंदरबांट कर ली गई।
मुख्य अभियंता का वर्जन: "सारे आरोप बेबुनियाद, जांच को तैयार" केएल वर्मा, चीफ इंजीनियर, ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा, "मैं सारे आरोपों की जांच के लिए तैयार हूं। सभी आरोप द्वेषवश लगाए गए हैं। जांच टीम के सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हूं।"
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