जबलपुर: मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) कांति लाल वर्मा पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच अब जाकर तेज हुई है। सालों से लंबित इस जांच में हो रही देरी का मुख्य कारण जांच अधिकारी और आरोपी के बीच की कथित पुरानी दोस्ती को बताया जा रहा है।

कंपनी प्रबंधन ने हाल ही में सागर के मुख्य अभियंता (CE) देवेंद्र कुमार को पत्र लिखकर उस जांच रिपोर्ट की स्थिति पूछी है, जो लंबे समय से अटकी हुई है और जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

याराना बना जांच में बाधा

सूत्रों के अनुसार, मुख्य अभियंता कांति लाल वर्मा और सागर सीई देवेंद्र कुमार एक ही बैच के अधिकारी हैं और दोनों की अंतरंगता पुरानी है। ये दोनों अधिकारी जब सागर में पदस्थ थे, तब एक ही कमरे में रहा करते थे। इस पुरानी और गहरी दोस्ती के चलते, ऐसी आशंका जताई जा रही है कि देवेंद्र कुमार के लिए अपने करीबी दोस्त श्री वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच करना या उन पर कार्रवाई की सिफारिश करना मुश्किल हो रहा था।

सूत्रों का दावा है कि इसी 'याराना' के चलते जांच सालों से अटकी हुई थी और इसमें कोई प्रगति नहीं हो सकी। हालांकि, यह भी बताया जा रहा है कि मामले में इतने पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं कि श्री वर्मा को क्लीन चिट देना भी असंभव था।

श्री वर्मा पर लगे गंभीर आरोप:

मुख्य अभियंता वर्मा पर कई गंभीर वित्तीय और पद के दुरुपयोग के आरोप हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  1. 5 करोड़ का भ्रष्टाचार: ईको सिटी कॉलोनी और मेगा सिटी कॉलोनी के विद्युतीकरण की स्वीकृति में 5 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार करने का आरोप है। आरोप है कि वर्मा ने डेवलपर से सांठगांठ कर अनुचित लाभ दिया और 33/11 KV उपकेंद्र को 'गपा' लिया गया, जिससे कंपनी को 5 करोड़ की वित्तीय क्षति हुई।

  2. जांच को दबाना: शिकायत सामने आने पर तत्कालीन मुख्य प्रबंधक नीता राठौर पर जांच को दबाने और छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने का आरोप लगा था।

  3. निजी कंपनियाँ चलाना: श्री वर्मा ने नौकरी में रहते हुए निजी तौर पर दो प्राइवेट कंपनियाँ खोल लीं— इनेफा स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड (पुणे) और एस3ए इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (गाजियाबाद), जिनमें उनकी पत्नी सरिता वर्मा को डायरेक्टर बनाया गया।

  4. नियम विरुद्ध कार्य: छतरपुर में शिवोहम कंस्ट्रक्शन कंपनी बिना अनुमति के खोली गई, जिसने नियम विरुद्ध तरीके से सागर रीजन में ट्रांसफार्मर लगा दिए।

  5. टेंडर में गड़बड़ी: कुछ माह पूर्व मुख्य अभियंता कार्यालय के सिविल रेनोवेशन के नाम पर एक करोड़ का टेंडर अपने चहेते ठेकेदार को देने का आरोप लगा था।

  6. लोकायुक्त की रेड: छिंदवाड़ा में पदस्थापना के दौरान जबलपुर लोकायुक्त टीम ने उनके निवास पर रेड की थी और प्रकरण भी बनाया था, हालांकि बाद में सबमिट रिपोर्ट निरस्त कर दी गई थी।

कंपनी प्रबंधन सख्त, रिटायरमेंट से पहले निर्णय की तैयारी

मुख्य अभियंता कांति लाल वर्मा के रिटायरमेंट से पहले कंपनी प्रबंधन अब इन गंभीर आरोपों पर निर्णय लेने की कवायद में जुट गया है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की एचआरए संपदा सराफ ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है।कंपनी की एचआरए संपदा सराफ ने कहा, "कंपनी के उच्च पद पर बैठे अधिकारी पर गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इस मामले में कंपनी ने सागर सीई को पत्र लिखकर जांच रिपोर्ट की स्थिति पर जवाब मांगा है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।"