प्रशासनिक सुधार: मध्य प्रदेश में भू-अभिलेख विभाग के पदों का नाम बदला, अधीक्षक भू-अभिलेख अब कहलाएँगे 'तहसीलदार'
जबलपुर। मध्य प्रदेश के भू-अभिलेख और राजस्व प्रशासन में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। राज्य शासन ने भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के फील्ड पदों का पुनर्गठन करते हुए उन्हें सीधे राजस्व अधिकारियों के समकक्ष कर दिया है। ग्वालियर स्थित कार्यालय संयुक्त आयुक्त, भू-संसाधन प्रबंधन, मध्य प्रदेश द्वारा 23 अक्टूबर 2025 को जारी एक आधिकारिक आदेश के माध्यम से यह परिवर्तन लागू किया गया है।
क्या हुआ है बदलाव?
इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल के तहत दो प्रमुख पदों के नाम और उनकी आधिकारिक पहचान बदल दी गई है:अधीक्षक भू-अभिलेख (Superintendent Land Records) को अब 'तहसीलदार' के रूप में जाना जाएगा।
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सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख (Assistant Superintendent Land Records) को अब 'नायब तहसीलदार' के रूप में जाना जाएगा।
यह निर्णय मध्य प्रदेश राजपत्र भाग 1 में 12 सितंबर 2025 को प्रकाशित शासन आदेश के संदर्भ में लिया गया है, जो भू-अभिलेख और सहायक भू-अभिलेख के संवर्गों को राजस्व विभाग के संवर्गों में समाहित करने के लिए था।
कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ:
इस पुनर्गठन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि नए नाम वाले इन अधिकारियों को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ भी प्रदान की गई हैं।
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तहसीलदार (पूर्व अधीक्षक भू-अभिलेख) को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट घोषित किया गया है।
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नायब तहसीलदार (पूर्व सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख) को भी कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के रूप में घोषित किया गया है।
कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्ति मिलने से ये अधिकारी अब राजस्व और भू-अभिलेख से संबंधित विवादों और प्रशासनिक मामलों में त्वरित निर्णय लेने तथा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकृत होंगे।
प्रशासनिक उद्देश्य:
इस व्यापक प्रशासनिक सुधार का मुख्य उद्देश्य भू-अभिलेख संवर्ग के अधिकारियों के सम्मान और उनके अधिकार क्षेत्र को बढ़ाना है, जिससे राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जा सके। यह कदम जनता को भू-अभिलेखों और राजस्व संबंधी कार्यों में बेहतर और त्वरित सेवाएँ प्रदान करने में सहायक होगा।
आदेश का क्रियान्वयन:
जारी आदेश में समस्त कलेक्टरों, उप आयुक्तों भू-अभिलेख, राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान, पटवारी प्रशिक्षण शालाओं तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस बदलाव के अनुसार आवश्यक संशोधन करें और व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार का भ्रम न हो। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिसका असर प्रदेश भर के राजस्व और भू-अभिलेख कार्यालयों की कार्यशैली पर पड़ेगा।यह माना जा रहा है कि इस बदलाव से राजस्व विभाग और भू-अभिलेख विभाग के बीच का समन्वय और मजबूत होगा, जिससे राजस्व मामलों का निपटारा और अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
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