जबलपुर । राष्ट्रीय हरित अधिकरण, एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव व एक्सपर्ट मेम्बर डा. ए सेंथिल वेल की युगलपीठ ने जबलपुर स्थित कठौंदा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की अव्यवस्थित कार्यप्रणाली को चिंताजनक निरूपित किया। इसी के साथ नगर निगम, जबलपुर व मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अद्यतन रिपोर्ट तलब कर ली। इसके लिए 29 अप्रैल, 2026 तक का समय दिया गया है। 

दरअसल, एनजीटी ने प्लांट से उत्पन्न प्रदूषण व धूल फैलने की शिकायत पर स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई प्रारंभ की है। मामले का संबंध मध्य प्रदेश राज्य में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी व्यापक पर्यावरणीय निगरानी से भी है।

इस प्रकरण में नगर निगम का कहना है कि प्लांट की क्षमता 600 टन प्रतिदिन अपशिष्ट और 11.5 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। बरसात में सहायक ईंधन का उपयोग किया जाता है।

बाटम ऐश का निपटान लैंडफिलिंग के माध्यम से किया जा रहा है। 500 मीटर त्रिज्या (194 एकड़) का बफर जोन निर्धारित किया गया है, जिसमें 28.83 एकड़ हरित क्षेत्र विकसित किया गया है। 35,000 बीजों में से 22,000 पौधे तैयार किए गए हैं। वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुरोध किया गया है। कठौंदा (3.0 लाख मीट्रिक टन) और रानीताल (1.62 लाख मीट्रिक टन) पर कुल 4.62 लाख मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट की पहचान की गई है। रानीताल साइट पर बायोरिमेडिएशन कार्य जारी है। कठौंदा साइट के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है।कुंदन ग्रीन एनर्जी ने 11 अप्रैल 2025 से प्लांट का संचालन संभाला है। सात अक्टूबर 2025 से 30 नवंबर 2025 तक प्लांट रखरखाव हेतु बंद रहेगा।

इस सिलसिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि बफर जोन में किसी भी प्रकार की बस्ती न हो। लेगेसी वेस्ट का शीघ्र निपटान हो। अपशिष्ट का उचित पृथक्करण न होने से प्लांट की क्षमता घट रही है। गीले अपशिष्ट का खाद या बायोडाइजेस्टर से निपटान किया जाए। फ्लाई ऐश और बाटम ऐश का निपटान पर्यावरण मंत्रालय के फ्लाई ऐश अधिसूचना के अनुसार किया जाए।

एनजीटी ने निर्देश दिया है कि प्लांट का प्रदर्शन असंतोषजनक है। प्लांट के पास संचालन की वैध अनुमति नहीं है। केवल 40 प्रतिशत अपशिष्ट ऊर्जा उत्पादन में प्रयुक्त हो रहा है, शेष पीछे डंप किया जा रहा है। प्लांट के बंद रहने की अवधि में 522 टन प्रतिदिन कचरा बिना प्रसंस्करण के रह जाएगा। लिहाजा, नगर निगम और पीसीबी प्लांट संचालन की स्थिति। प्लांट आपरेटर को दी गई अनुमति की प्रति। प्लांट बंदी के दौरान कचरे के प्रबंधन की योजना। बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट के निपटान की समयबद्ध कार्ययोजना। कठौंदा व रानीताल स्थलों पर लेगेसी वेस्ट की वास्तविक मात्रा और उसके निपटान की योजना के साथ पर्यावरण संरक्षण हेतु बफर जोन का रखरखाव और निगरानी आदि के बारे में जानकारी प्रस्तुत की जानी चाहिए।