जबलपुर।
चिकित्सा के क्षेत्र में एक अद्भुत सफलता दर्ज करते हुए, नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NSCB Medical College, जबलपुर) के चिकित्सकों ने एक नन्ही जान को नई जिंदगी दी है। दमोह जिले की 17 माह की बच्ची गरिमा हिरा सिंह के फेफड़ों की मुख्य श्वसन नली में फंसी एलईडी लाइट को डॉक्टरों ने कुशलता से निकालकर उसकी जान बचा ली। विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्परता और टीमवर्क से बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।

एलईडी लाइट बनी जानलेवा खतरा

दमोह निवासी हिरा सिंह और चांदनी की पुत्री गरिमा को पिछले एक सप्ताह से लगातार खांसी की शिकायत थी। जब हालत बिगड़ी तो परिजन 25 अक्टूबर को मुरली मनोहर अस्पताल दमोह लेकर पहुंचे।यहां चेस्ट एक्स-रे में डॉक्टरों को शक हुआ कि बच्ची के फेफड़ों में कोई विदेशी वस्तु (Foreign Body) फंसी हुई है, जो सांस लेने में बाधा डाल रही थी। स्थिति को गंभीर देखते हुए, बच्ची को 26 अक्टूबर को NSCB मेडिकल कॉलेज, जबलपुर रेफर किया गया।

 ब्रोंकोस्कोपी से निकाला गया 'विदेशी खिलौना'
जबलपुर पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने तत्काल ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) करने का निर्णय लिया। जांच में पाया गया कि बच्ची के दाहिने फेफड़े की मुख्य श्वसन नली (Right Main Bronchus) में एलईडी लाइट फंसी हुई थी।इतनी छोटी बच्ची के नाजुक फेफड़ों से इस तरह की वस्तु निकालना बेहद जटिल और जोखिमपूर्ण था। बावजूद इसके, डॉक्टरों ने असाधारण कौशल का प्रदर्शन करते हुए एलईडी लाइट को सुरक्षित रूप से निकालने में सफलता प्राप्त की।

 तीन दिन आईसीयू में संघर्ष, फिर मिली छुट्टी

ऑपरेशन के बाद गरिमा को पेडियाट्रिक आईसीयू (PICU) में भर्ती किया गया, जहाँ उसे 27 से 29 अक्टूबर तक मेकैनिकल वेंटिलेशन (SIMV Mode) पर रखा गया।डॉक्टरों की निरंतर निगरानी और देखभाल से उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। 29 अक्टूबर की सुबह उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर डिस्चार्ज कर दिया गया।

माता-पिता ने जताया आभार

गरिमा के माता-पिता ने भावुक होते हुए कहा —“डॉक्टरों ने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया है। यह हमारे परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी का दिन है।”
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस उपलब्धि को टीमवर्क, विशेषज्ञता और समर्पण का परिणाम बताया। इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित किया है कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज प्रदेश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में से एक है।