फुटेज दबाने और गलत रिपोर्ट पेश करने के आरोपों पर मांगा चार सप्ताह में जवाब, भक्तों में न्याय की उम्मीद जागी

जबलपुर। पिछले वर्ष न्यू शोभापुर तिराहा स्थित बाल स्वरूप श्री हनुमान मंदिर में हुई चोरी की वारदात एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। इस प्रकरण में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक जबलपुर और थाना प्रभारी रांझी को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं लता कुशवाहा, किरण तिवारी, सरिता नारायण यादव, जितेंद्र बंटी रजक, आशीष शर्मा और एल.एन. रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि थाना प्रभारी रांझी ने चोरी के आरोपियों को बचाने के लिए मनगढ़ंत कहानी बनाकर अधीनस्थ न्यायालय में गलत जानकारी पेश की थी। इतना ही नहीं, सीसीटीवी फुटेज को छिपाने का प्रयास भी किया गया, जबकि याचिकाकर्ताओं ने चोरी की घटना का वीडियो फुटेज न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है।हाईकोर्ट ने फुटेज देखने और पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए मामले की गंभीरता पर सवाल उठाए। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि यदि पुलिस ने जानबूझकर तथ्यों को दबाया है, तो यह न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।

भक्तों में खुशी, न्याय की उम्मीद बढ़ी
इस खबर के फैलते ही शोभापुर और आसपास के क्षेत्र के भक्तों में उत्साह और राहत की लहर दौड़ गई। लोगों का कहना है कि अब उन्हें उम्मीद है कि वास्तविक आरोपियों पर कार्रवाई होगी और चोरी की सच्चाई सामने आएगी।स्थानीय श्रद्धालुओं ने कहा कि मंदिर में हुई चोरी केवल आर्थिक नुकसान नहीं थी, बल्कि आस्था पर भी आघात था। “अब न्याय की किरण दिख रही है, उम्मीद है दोषी जल्द सलाखों के पीछे होंगे,” एक श्रद्धालु ने कहा।

अधिवक्ताओं ने रखी मजबूत दलीलें
मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता विद्याशंकर मिश्रा, राधन झा, अनिकेश मिश्रा, और नवीन विश्वकर्मा ने की। अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस ने मामले को कमजोर करने की कोशिश की और साक्ष्य छिपाए, जबकि चोरी के वीडियो फुटेज में आरोपी स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

आगामी सुनवाई में खुल सकते हैं कई राज
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब पुलिस अधिकारियों को अपनी कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करना होगा। अगली सुनवाई में पुलिस की भूमिका और लापरवाही पर बड़ा खुलासा होने की संभावना है।इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।