जबलपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक का शनिवार को जबलपुर में सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस ऐतिहासिक बैठक में देश भर से आए 397 शीर्ष पदाधिकारियों ने गहन विचार-मंथन किया, जिसके बाद संघ के आगामी शताब्दी वर्ष की रूपरेखा और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर संघ का रुख स्पष्ट किया गया।

समापन सत्र में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा, "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा में जबलपुर का नाम अब दर्ज हो गया है। यहां हुए विचार-मंथन से आने वाले वर्षों की दिशा तय होगी। समाज का कोई भी समुदाय ऐसा नहीं जो संघ के संपर्क से अछूता हो।"

शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते कदम: राष्ट्र निर्माण और जन-जागरण

 

होसबाले ने बताया कि आने वाला वर्ष संघ के शताब्दी वर्ष का प्रारंभिक पड़ाव होगा, जिसमें राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, संगठन विस्तार और जनजागरण पर विशेष ध्यान केंद्रित रहेगा। उन्होंने हाल ही में देशभर में संपन्न हुए विजयदशमी उत्सवों का भी उल्लेख किया:

  • विजयदशमी उत्सव: देशभर में 62,555 स्थानों पर विजयदशमी उत्सव संपन्न हुए।

  • स्वयंसेवकों की भागीदारी: इन उत्सवों में 32 लाख से अधिक स्वयंसेवक गणवेश में शामिल हुए।

  • पथ संचलन: 25 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं ने पथ संचलन में भाग लिया, जो संघ की संगठनात्मक शक्ति का परिचायक है।

 

 संगठन विस्तार और सामुदायिक पहुंच

 

संघ ने पिछले एक वर्ष में संगठन विस्तार पर विशेष जोर दिया है, जिसमें सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।

  • नई शाखाएं: इस साल 6,226 नई शाखाओं की स्थापना हुई, जिससे अब देशभर में कुल 87,000 से अधिक शाखाएं सक्रिय हैं।

  • पंच परिवर्तन कार्यक्रम: होसबाले ने घोषणा की कि आने वाले समय में संघ 'पंच परिवर्तन कार्यक्रम' के तहत 82,000 से अधिक सामाजिक सम्मेलन आयोजित करेगा।

  • गृह संपर्क अभियान: 'गृह संपर्क अभियान' के माध्यम से संघ करोड़ों लोगों तक पहुंचेगा और समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास करेगा।

 

 तीन महत्वपूर्ण वक्तव्य: बलिदान, शौर्य और राष्ट्र गौरव

 

बैठक के दौरान संघ ने तीन महत्वपूर्ण वक्तव्य जारी किए, जो राष्ट्र के इतिहास और गौरव से जुड़े हैं:

  1. गुरु तेगबहादुर जी की शहादत पर श्रद्धांजलि: संघ ने घोषणा की कि गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा और आने वाले वर्ष में उनकी प्रेरणा से जुड़ी कई राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

  2. भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: संघ ने भगवान बिरसा मुंडा को केवल जनजातीय नेता नहीं, बल्कि भारत का समग्र राष्ट्रनायक बताया। होसबाले ने कहा, "भगवान बिरसा मुंडा ने न सिर्फ अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, बल्कि धर्मांतरण को भी रोका। उनकी 150वीं जयंती पर देशभर में विशेष आयोजन होंगे।"

  3. 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष: संघ ने घोषणा की कि "वंदे मातरम्" के 150 वर्ष पूरे होने पर वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम किए जाएंगे। होसबाले ने कहा, "वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, यह भारत की आत्मा है। 1975 में जब इसके 100 वर्ष पूरे हुए थे, तब आपातकाल के कारण आयोजन नहीं हो पाए थे, अब यह ऐतिहासिक अवसर है।"

 

राष्ट्रीय चुनौतियों पर संघ का रुख

 

सरकार्यवाह ने कई राष्ट्रीय चुनौतियों पर भी संघ का दृष्टिकोण साझा किया:

  • मणिपुर की स्थिति: उन्होंने कहा कि मणिपुर में स्थिति में सुधार आया है और प्रधानमंत्री के दौरे से पुनरुत्थान की नई उम्मीद जगी है। उन्होंने सबको साथ लेकर चलने और मिलकर आगे बढ़ने पर जोर दिया।

  • नक्सली गतिविधियां: छत्तीसगढ़ और झारखंड में नक्सली गतिविधियों की समीक्षा करते हुए होसबाले ने कहा कि कई लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।

  • युवा और कुटुंब प्रबोधन: युवाओं में ड्रग्स की बढ़ती प्रवृत्ति को चिंता का विषय बताते हुए उन्होंने कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने की बात कही। उन्होंने धर्मांतरण की बढ़ती प्रवृत्ति के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

 

 राजनीतिक बयान पर प्रतिक्रिया

 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा RSS पर बैन की मांग पर होसबाले ने तीखी प्रतिक्रिया दी:

  • उन्होंने कहा, "बैन करने के पीछे कोई ठोस कारण तो होना चाहिए। जो संघ राष्ट्र निर्माण में जुटा है, उसे प्रतिबंधित करने से किसी को क्या मिलेगा? जनता ने RSS को स्वीकार किया है।"

  • बंगाल की स्थिति: उन्होंने बंगाल में पिछले चुनावों के बाद द्वेष और हिंसा के वातावरण पर चिंता व्यक्त की और कहा कि सरकार को राष्ट्रीय दृष्टि से सोचते हुए शांति और समरसता की दिशा में कदम उठाने चाहिए।