मेडिकल कॉलेज में फिर सक्रिय खून के दलाल: 5 हजार में रक्त बेचते दो युवक रंगेहाथ पकड़े गए, सुरक्षा एजेंसी ने कराया गिरफ्तार
जबलपुर।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बार फिर खून के काले कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। अस्पताल परिसर में सक्रिय दो दलालों को 5 हजार रुपए में एक यूनिट खून बेचने का सौदा करते हुए सुरक्षा एजेंसी के कर्मियों ने रंगेहाथ पकड़ लिया। मामले की जानकारी मिलते ही गढ़ा थाना पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान अन्नू और जॉनसन के रूप में हुई है, जो पिछले कुछ समय से अस्पताल परिसर में खून का अवैध कारोबार कर रहे थे।
इस तरह हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, एक ब्लड डोनेशन संस्था ने जरूरतमंद मरीज के लिए रक्त की व्यवस्था के उद्देश्य से अस्पताल में संपर्क किया था। इसी दौरान संस्था के पदाधिकारियों की बातचीत अस्पताल परिसर में मौजूद दो युवकों कृ अन्नू और जॉनसन कृ से हुई।दोनों ने कहा कि वे तुरंत 5 हजार रुपए में ब्लड की व्यवस्था कर देंगे, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह “प्राइवेट” रहेगी।संस्था के सदस्यों को मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने तुरंत अस्पताल की सुरक्षा एजेंसी को इसकी सूचना दी।सुरक्षा कर्मियों ने योजना बनाकर दोनों दलालों को रंगेहाथ पकड़ लिया, जब वे सौदा पक्का कर नकद राशि ले रहे थे।
पुलिस जांच में जुटी
गार्डों ने तुरंत गढ़ा थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुँची और दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है कि वे किन लोगों से संपर्क में थे और क्या अस्पताल के अंदर किसी कर्मचारी की मिलीभगत थी।सूत्रों के अनुसार, यह संभावना जताई जा रही है कि दोनों लंबे समय से अस्पताल में आने वाले जरूरतमंद मरीजों और परिजनों को निशाना बनाकर उनसे पैसे लेकर खून की व्यवस्था करते थे।
अस्पताल प्रबंधन ने कही सख्त कार्रवाई की बात
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि अस्पताल परिसर में खून या किसी भी तरह के अवैध सौदेबाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसी को निर्देश दिया है कि ब्लड बैंक के आसपास निगरानी और कड़ी की जाए तथा आने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति की जांच की जाए।
पूर्व में भी पकड़े जा चुके हैं खून के दलाल
यह कोई पहली बार नहीं है जब मेडिकल अस्पताल में खून के सौदागर पकड़े गए हों। इससे पहले भी कई बार ऐसे गिरोह सक्रिय पाए गए हैं, जो मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर 3 से 10 हजार रुपए में रक्त का सौदा करते हैं।
ब्लड बैंक स्टाफ की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे प्रकरण में ब्लड बैंक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध भी मानी जा रही है। जबलपुर मेडिकल अस्पताल में बार-बार सामने आ रहे खून के काले कारोबार के मामले न केवल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि जरूरतमंद मरीजों के नाम पर अवैध कमाई का नेटवर्क सक्रिय है।पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जल्द ही इनके अन्य साथियों तक पहुँचने के लिए जांच तेज करने की बात कही है।
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