तीन नए जिलों की सौगात, पर सिहोरा फिर सूबे के नक्शे से गायब- नेताओं के वादों से टूटा जनविश्वास
जबलपुर। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक पुनर्गठन की बड़ी कवायद के बीच सिहोरा एक बार फिर उपेक्षा का शिकार हो गया है। राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग जहां तीन नए जिलों — पिपरिया, बीना और सीहोर को आकार देने की तैयारी में जुटा है, वहीं दो दशक से अपने जिले का सपना देख रहे सिहोरा के लोगों की उम्मीदें फिर टूट गईं। इस बीच, निमाड़ को प्रदेश का 11वां संभाग बनाए जाने की कवायद भी जारी है, जिससे 25 से अधिक जिलों की सीमाएं प्रभावित होंगी।
🔹 आंदोलन जिंदा, पर असर गायब
सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग 22 साल से जारी है। हर चुनाव में यह मुद्दा फिर से उठता है, नेता वादे करते हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहता है। हाल ही में लोगों ने पानी में डूबकर और मिट्टी में धंसकर प्रदर्शन किया, खून से दीपक जलाए, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जनता का आरोप है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों ने केवल वोट के समय आश्वासन दिए, बाद में मुंह मोड़ लिया।
🔹 अधर में लटकी उम्मीदें
जानकारों का कहना है कि सरकार यदि सिहोरा को जिला नहीं बना सकती तो स्पष्ट बयान दे, लेकिन लगातार “वोट बैंक की राजनीति” के कारण इस मुद्दे पर सन्नाटा पसरा है। विरोध करने वाले कहते हैं कि “सरकार स्पष्ट इंकार नहीं करती, ताकि वोट न खो जाए, और हां भी नहीं करती ताकि काम न करना पड़े।”
🔹 अब आमरण अनशन की चेतावनी
सिहोरा जिला संघर्ष समिति ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। समिति के सदस्य आरएसएस प्रचारक प्रमोद साहू ने घोषणा की है कि 6 दिसंबर (शौर्य दिवस) से वे अन्न का त्याग करेंगे, और यदि सरकार ने तब भी ध्यान नहीं दिया तो 9 दिसंबर से जल त्यागकर आमरण अनशन शुरू करेंगे। मझौली बायपास पर हुई समिति की बड़ी बैठक में प्रमोद सेठी, राजेश चैबे, लाल बहादुर पाठक, नरेंद्र त्रिपाठी, रवदीप सिंह, राकेश पाठक, नितिन साहू, नितिन सेन और मानस तिवारी शामिल हुए। सभी ने “जन्मभूमि की कसम” खाते हुए आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। सभा का संचालन विकास दुबे ने किया।
🔹 सवाल बरकरार
प्रदेश में नए जिले और संभाग तो बन रहे हैं, लेकिन सिहोरा की आवाज अब भी अनसुनी है। जनता का सवाल है — “आखिर सिहोरा के साथ ही न्याय क्यों नहीं?” क्या सरकार इस बार भी सिहोरा को सिर्फ चुनावी वादों में ही उलझाए रखेगी, या 22 साल पुरानी इस मांग को अब सच में सुनेगी?
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