जबलपुर।
सिहोरा वन परिक्षेत्र में एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र के गौरहा घाट बीट में एक मादा तेंदुए का शव मिलने से हड़कंप मच गया। इस घटना ने 20 दिन पहले हरगढ़ क्षेत्र में मिले दूसरे तेंदुए के शव की याद ताजा कर दी है। लगातार हो रही इन घटनाओं से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।


 पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

वेटरनरी विश्वविद्यालय के वन्य प्राणी विशेषज्ञों की टीम ने मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ एंड फोरेंसिक हेल्थ सेंटर में किया।
डॉक्टरों के अनुसार, तेंदुए की गर्दन पर गहरे घावों के निशान पाए गए हैं, जिससे यह आशंका और मजबूत होती है कि उसकी मौत एनिमल फाइट (आपसी संघर्ष) में हुई होगी।
चिकित्सकों ने यह भी बताया कि मृत तेंदुए के नाखूनों में दूसरे जानवर की चमड़ी के अवशेष मिले हैं, जो संघर्ष की पुष्टि करते हैं।


 दो दशकों में दो मौतें — जांच में जुटा वन विभाग

घटना की जानकारी मिलते ही डीएफओ ऋषि मिश्रा और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। गौरहा–गंजताल मार्ग पर चितावर माता मंदिर के पास सड़क किनारे शव मिलने की सूचना पर टीम ने पूरे क्षेत्र की सर्चिंग कर साक्ष्य जुटाए।
प्रारंभिक जांच के आधार पर एनिमल फाइट या क्षेत्रीय संघर्ष को संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि विसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।


सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

केवल 20 दिनों में सिहोरा वन परिक्षेत्र में दो तेंदुओं की मौत होना वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि क्षेत्र में लगातार घटता आवास, अवैध चराई और मानव गतिविधियां तेंदुओं के बीच संघर्ष बढ़ा रही हैं।
जनता ने मांग की है कि वन्यजीव सुरक्षा गश्त को बढ़ाया जाए और क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों का दायरा विस्तृत किया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


तथ्य फ़ाइल:

  • मृत तेंदुआ: मादा

  • स्थान: गौरहा घाट, सिहोरा वन परिक्षेत्र

  • प्राथमिक कारण: एनिमल फाइट की आशंका

  • जांच कर रहे अधिकारी: डीएफओ ऋषि मिश्रा

  • पोस्टमार्टम स्थल: स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ एंड फोरेंसिक हेल्थ सेंटर, वेटरनरी यूनिवर्सिटी