जबलपुर: हैदराबाद से आए 57 रेसिंग-घोड़ों का रहस्यमयी संकट — 19 की मौत, कुछ लापता, ग्लैंडर्स की आशंका
जबलपुर — हैदराबाद से मध्यप्रदेश के पनागर स्थित रैपुरा गाँव के एक प्राइवेट फार्म हाउस में लाए गए कुल 57 रेसिंग/हेरिटेज घोड़ों के मामले ने जिलाधिकारी से लेकर हाईकोर्ट तक का ध्यान खींच लिया है। यह घोड़े मई के पहले सप्ताह में हैदराबाद से रैपुरा लाए गए थे और घटना के बाद प्रशासन, पशु चिकित्सा व पुलिस टीमें सतर्क कर दी गईं।
मौतों की बढ़ती संख्या और लापरवाही के आरोप
पहले कुछ घोड़ों की अचानक मौत की खबरें आईं; प्रारंभिक रिपोर्टों में 8 की मौत की सूचना मिली थी, जो बाद में बढ़कर कई दस्तावेजी रिपोर्टों में कुल 19 मौतों तक पहुंच गई। घटनास्थल पर पशु चिकित्सकीय निरीक्षण और इलाज के बावजूद यह संख्या बढ़ती रही, जिससे प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
कहां कमी दिखी — परिवहन व आवास में गंभीर चूक का आरोप
जाखिरियों और अधिकारियों की प्रारम्भिक जाँच में आया है कि घोड़ों का सड़क मार्ग से परिवहन, मेडिकल सर्टिफिकेटों की अनुपस्थिति और रैपुरा के फार्म पर उपलब्ध सुविधाओं में गंभीर कमी होने के आरोप लग रहे हैं। जांच में यह भी मिला कि कई घोड़े गो-पालन/बैल-ठेके जैसी जगहों पर रखे गए, जहाँ घोड़ों के लिए उपयुक्त सुव्यवस्थित स्टेबल नहीं थे — जिससे संक्रमण और स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्लैंडर्स (Glanders) की आशंका और पॉजिटिव रिपोर्ट
कई रिपोर्टों और पशु विभाग के नियंत्रण के बाद-जाँच में कुछ नमूनों में ग्लैंडर्स (Glanders) जैसी खतरनाक संक्रामक बीमारी की आशंका व्यक्त की गई तथा एक घोड़े का सकारात्मक परीक्षण (positive) सामने आने की खबरें आई हैं। ग्लैंडर्स घोड़ों के लिए घातक और zoonotic होने के कारण—यानी मनुष्यों में भी संक्रमण का जोखिम होने के कारण—प्रशासन ने क्वारंटीन और निगरानी कड़ी कर दी है। Navbharat
फार्म-मालिक व हैदराबाद-कम्पनी के खिलाफ एफआईआर, हाईकोर्ट ने निर्देश दिए
पशु पालन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा जरूरी कार्रवाई के बाद पनागर थाने में फार्म-हाउस संचालक व हैदराबाद से घोड़े लाने वाली कंपनी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है; पशु क्रूरता निवारण अधिनियम व संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं और एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। साथ ही, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस प्रकरण की गम्भीरता देखते हुए कलेक्टर को विस्तृत रिपोर्ट मांगने सहित आगे की जांच निर्देशित की है।
कई घोड़े लापता — संख्यात्मक विसंगति पर सवाल
स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में इस ट्रांसफ़र के क्रम में दस्तावेजी और दर्ज न कराई गई जानकारियों का हवाला देते हुए यह भी बताया गया है कि कुछ घोड़े अभी-तक ट्रेस नहीं हो रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों में संख्या-विसंगति की बात उठी है — कुछ रिपोर्टों ने "लापता" या "अनट्रेस्ड" घोड़ों का जिक्र किया है, जिस पर भी प्रशासनि जाँच जारी है। (मीडिया रिपोर्ट्स में घोड़ों की संख्या व उनकी पाबन्दी के बारे में जानकारी में अंतर मिल रहा है)।
प्रभाव व प्रशासनिक कदम
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पशु चिकित्सा टीमें 24×7 निगरानी एवं इलाज में लगी हैं; प्रभावित घोड़ों के नमूने लैब में भेजे गए हैं।
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फार्म के केयरटेकर व संचालक से पूछताछ की जा रही है; आवश्यक भएपछि पशु जब्त और क्वारंटीन निर्देश लागू किए गए।
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हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कलेक्टर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है और मामले की उच्च स्तरीय जांच का रास्ता साफ़ हो गया है।
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हैदराबाद से यह ट्रांसपोर्ट किस अनुमति और किस दस्तावेज़ के साथ हुआ—मेडिकल फिटनेस, परिवहन पास और ग्राम-पंचायत/जिला प्रशासन को सूचित किया गया था या नहीं।
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कितने घोड़े वास्तव में लाये गए थे और वर्तमान में कितने ट्रेस-एबल हैं (विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में आंकड़े अलग-अलग मिल रहे हैं)।
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क्या घोड़ों की मृत्युवो के कारण पूरी तरह संक्रमित बीमारी थी या खराब रख-रखाव, गर्मी/पोषण की कमी और क्रूर परिवहन ने भी भूमिका निभाई?
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