जेएनकेविवि में गैंगरेप का दाग: आरोपी कर्मचारी निलंबित -नौकरी का झांसा, दरिंदगी का खेल
जबलपुर। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनकेविवि) के सुरक्षित माने जाने वाले परिसर को शर्मसार करने वाले गैंगरेप मामले में आखिरकार विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। प्रकरण की गंभीरता और पुलिस से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर विवि प्रबंधन ने दोनों आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए कर्मचारियों में यूडीसी दुर्गाशंकर सिंगरहा और प्यून मुकेश सेन शामिल हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के उद्देश्य से आरोपियों को मुख्य परिसर से हटाकर अन्य स्थानों पर अटैच किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान यूडीसी दुर्गाशंकर सिंगरहा को कृषि महाविद्यालय खुरई, जबकि प्यून मुकेश सेन को कृषि कॉलेज पन्ना में अटैच किया गया है। इस कार्रवाई से साफ है कि विवि प्रबंधन अब मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
विवि के कुलसचिव डॉ. एके जैन ने बताया कि पुलिस प्रशासन से मिले तथ्यों और इनपुट के बाद यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि यदि आरोपी कर्मचारी मुख्यालय में बने रहते, तो इससे जांच प्रभावित होने की आशंका थी। इसी कारण तत्काल प्रभाव से उन्हें परिसर से दूर किया गया। डॉ. जैन ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक आगे भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि यह मामला उस समय उजागर हुआ जब नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप सामने आया। इस सनसनीखेज घटना ने न सिर्फ विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि पूरे परिसर में भय और असहजता का माहौल भी पैदा कर दिया है। स्थिति यह है कि कर्मचारी और अधिकारी अब बाहरी लोगों से बातचीत करने से भी बच रहे हैं।
भर्ती, नियुक्ति या रिक्त पदों से जुड़ी सामान्य जानकारी के लिए भी अब कर्मचारी किसी तरह की मौखिक जानकारी देने से परहेज कर रहे हैं। अधिकारियों ने आवेदकों को सीधे विश्वविद्यालय के आधिकारिक पोर्टल से ही जानकारी प्राप्त करने की सलाह देना शुरू कर दिया है। इससे साफ झलकता है कि प्रशासन अब हर स्तर पर सतर्कता बरत रहा है।
इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है, क्योंकि उन पर आरोपियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लग रहे थे। अब पूरे मामले में सबकी निगाहें पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट और चार्जशीट पर टिकी हुई हैं, जिससे यह तय होगा कि आगे आरोपियों पर क्या कानूनी कार्रवाई होती है।
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