वीयू में भ्रष्टाचार का ‘डॉ.’ मॉडल! फर्जी दस्तावेज़, नियमों की धज्जियां और 15 लाख का खेल”
जबलपुर। नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (वीयू) जबलपुर के प्रोफेसर एवं संपदा अधिकारी डॉ. एस. के. कारमोरे के विरुद्ध कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बड़ा खुलासा किया है। एबीवीपी ने कुलपति को ज्ञापन देकर मामले का खुलासा किया है।

शिकायत में एबीवीपी ने आरोप लगाया है कि डॉ. कारमोरे ने प्रशासन से तथ्य छिपाकर धोखाधड़ी करते हुए नौकरी प्राप्त की। संगठन का दावा है कि डॉ. कारमोरे की तीन संतानें हैं, जबकि सर्विस बुक में केवल दो बच्चों का उल्लेख किया गया है।

टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
एबीवीपी ने फर्नीचर क्रय से जुड़ी निविदाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि फर्नीचर का टेंडर एक एजुकेशन कंसल्टेंसी फर्म को दिया गया, जो इस कार्य के लिए पात्र नहीं है।
ज्ञापन के अनुसार, हाल ही में जबलपुर और महू के लिए ळमड पोर्टल के माध्यम से जारी निविदा में भाग लेने वाली फर्मों से कई दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन किसी भी फर्म ने पूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इसके बावजूद दो फर्मोंकृमेसर्स चौधरी एग्रो और मेसर्स एडविन एजुकेशनकृके दस्तावेज मान्य कर दरें खोली गईं और न्यूनतम दर देने वाली मेसर्स एडविन एजुकेशन को कार्यादेश जारी कर दिया गया।
एबीवीपी का आरोप है कि मेसर्स एडविन एजुकेशन फर्नीचर आपूर्ति हेतु पंजीकृत नहीं है और उसका जीएसटी क्रमांक  भी फर्नीचर निर्माता/विक्रेता श्रेणी में जारी नहीं है। इसके बावजूद स्टील फोल्डिंग कोट, टेबल, चेयर, डाइनिंग टेबल व चेयर के लिए क्रमशः ₹12.88 लाख और ₹1.84 लाख के कार्यादेश जारी किए गए।

समिति गठन और कर्मचारियों पर आरोप
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि निविदा खोलने हेतु गठित समिति नियमों के विपरीत बनाई गई, जिसमें केवल चार सदस्य हैं और उनमें से एक ठेका श्रमिक है। साथ ही, समिति में लेखा नियंत्रक महेश कोरी को शामिल करने पर भी आपत्ति जताई गई है, जिन पर ईओडब्ल्यू में मामला पंजीबद्ध होने का आरोप संगठन ने लगाया है। इसके अलावा, आरोप है कि नियमित कर्मचारियों के होते हुए भी कार्यालयीन कार्य संविदा व दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों से कराया जा रहा है, ताकि कथित तौर पर अनियमितताओं पर नियंत्रण न रहे।

अन्य गंभीर आरोप
एबीवीपी ने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. कारमोरे ने फर्जी एफडीआर में बैंक मैनेजर के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर अपने चहेतों को नियमविरुद्ध टेंडर दिलाए। संगठन ने पिछले चार वर्षों में हुए सभी सिविल कार्यों की तत्काल जांच, डेयरी से जुड़े लाखों रुपये के कथित घोटाले की पुनः पड़ताल तथा गलत प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने के आरोपों की भी जांच की मांग की है।

जांच की मांग, जवाब का इंतजार
एबीवीपी ने कुलपति से समस्त आरोपों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन या डॉ. एस. के. कारमोरे की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।