कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप
जबलपुर। कर्मचारियों की सी.पी.एफ. राशि की कटौती में हुई गंभीर अनियमितता को लेकर संघ द्वारा दिए गए ज्ञापन पर अब तक कोई कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। इस संबंध में संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी द्वारा जारी विज्ञप्ति में प्रशासन की उदासीनता पर सवाल खड़े किए गए हैं।

संघ ने बताया कि वर्ष 2007 में संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक कार्यालय की स्थापना के अंतर्गत नियुक्त कर्मचारियों के वेतन से नियमित रूप से सी.पी.एफ. की कटौती की जाती थी। 1 अप्रैल 2018 को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में एन.पी.एस. योजना लागू होने के बाद सी.पी.एफ. की राशि को एन.पी.एस. खातों में समायोजित किया जाना था। लेकिन कर्मचारियों के अनुसार उनके सी.पी.एफ. खाते में जमा कुल राशि में से केवल लगभग आधी राशि ही एन.पी.एस. खातों में जमा की गई, जबकि शेष करोड़ों रुपये की राशि का आज तक कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

संघ का आरोप है कि अधिष्ठाता कार्यालय के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों की सी.पी.एफ. की संपूर्ण राशि (कर्मचारी एवं नियोक्ता अंशदान सहित) उनके एन.पी.एस. खातों में समायोजित कर दी गई, लेकिन अधीक्षक कार्यालय के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के साथ ऐसा नहीं किया गया। इस असमानता को लेकर संघ ने चार माह पूर्व अधिष्ठाता महोदय को ज्ञापन सौंपकर समस्या के शीघ्र निराकरण की मांग की थी, परंतु आज दिनांक तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कर्मचारियों का कहना है कि जब वे इस संबंध में अधिष्ठाता कार्यालय में पूछताछ करते हैं तो उन्हें अधीक्षक कार्यालय भेज दिया जाता है और अधीक्षक कार्यालय से पुनः अधिष्ठाता कार्यालय जाने की सलाह दी जाती है। इस तरह कर्मचारी लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जिससे मानसिक और आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है।

संघ ने करोड़ों रुपये की इस वित्तीय अनियमितता को गंभीर बताते हुए मांग की है कि कर्मचारियों की सी.पी.एफ. से काटी गई पूरी राशि को शीघ्र उनके एन.पी.एस. खातों में समायोजित किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह मांग संघ के सुनीला ईशादीन, अजय दुबे, राजू मस्के, प्रशांत, घनश्याम पटेल, साहिल, रमेश, संतराम, दिलीप, अमित, प्रेम, बृजकिशोर, ऋषि, कन्हैयालाल, विनोद, शैलेन्द्र, गोपाल सहित अन्य कर्मचारियों ने उठाई है।