सोनाग्राफी कराने स्ट्रेचर में  पहुंचा था मरीज, मेडिकल प्रबंधन मामले को दबाने में जुटा
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। आरोप है कि सोनोग्राफी कराने पहुंचे एक टीबी मरीज को अस्पताल की एक महिला स्टाफ द्वारा सबके सामने सात थप्पड़ मारे गए। इतना ही नहीं, घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन मामले को दबाने में जुट गया और पीड़ित पक्ष से एक लिखित बयान पर हस्ताक्षर करवा लिए गए, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई।

स्ट्रेचर पर पहुंचा मरीज, सोनोग्राफी कक्ष में विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार निवास पिपारिया निवासी सुनीता रैकवार ने बताया कि उनके भाई कुलदीप रैकवार को टीबी की शिकायत के चलते 29 जनवरी को अस्पताल के टीबी चेस्ट विभाग में भर्ती कराया गया था। गुरुवार की शाम डॉक्टरों ने मरीज की सोनोग्राफी कराने के निर्देश दिए। इसके बाद परिजन मरीज को स्ट्रेचर पर सोनोग्राफी कक्ष तक लेकर पहुंचे।सुनीता रैकवार का आरोप है कि सोनोग्राफी कक्ष में मौजूद महिला स्टाफ ने मास्क को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि मरीज को डबल मास्क पहनाकर लाया जाए। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की ओर से जो मास्क उपलब्ध कराया गया था, मरीज वही पहने हुए था। इसी बात को लेकर कथित रूप से महिला स्टाफ नाराज हो गई।

सबके सामने सात थप्पड़, बिना जांच लौटाया
परिजनों का आरोप है कि नाराज स्टाफ ने मरीज को सबके सामने लगातार सात थप्पड़ जड़ दिए। इतना ही नहीं, सोनोग्राफी किए बिना ही मरीज को वहां से लौटा दिया गया। इस घटना से अस्पताल में मौजूद अन्य लोग भी स्तब्ध रह गए। टीबी जैसे गंभीर रोग से पीड़ित मरीज के साथ इस तरह का व्यवहार चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। परिजन इसे अमानवीय और अपमानजनक बता रहे हैं।

 शिकायत पर डराया-धमकाया, लिखित बयान पर हस्ताक्षर
पीड़िता की बहन सुनीता रैकवार का कहना है कि उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को इस संबंध में शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन वहां से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, उन्हें यह कहकर डराया गया कि यदि शिकायत की तो मरीज की जांच और इलाज प्रभावित हो सकता है।परिजनों का आरोप है कि बाद में उनसे एक कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए गए, जिसमें यह लिखा था कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उनका कहना है कि दबाव और भय के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ा।

उचित कार्रवाई का आश्वासन
इस पूरे मामले में अधिकारियों का कहना है कि मरीज के साथ मारपीट की घटना गलत है जिसने भी ये किया है उसकी जांच कराके संबंधित पर उचित कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल चिकित्सा नैतिकता का उल्लंघन है बल्कि मरीजों के अधिकारों पर सीधा आघात भी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह दबा दिया जाएगा।