नगर निगम की जांच के बाद लीज निरस्तीकरण की तैयारी, करोड़ों की जमीन पर घमासान

जबलपुर। राइट टाउन स्थित करोड़ों की प्रॉपर्टी को लेकर सामने आए डॉ. हेमलता श्रीवास्तव प्रकरण में अब नया मोड़ आ गया है। नगर निगम की जांच में खुलासा होने के बाद रजिस्ट्री कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पूरी जमीन नगर निगम की लीज पर होने के बावजूद दानपत्र और वसीयत के दस्तावेज बिना वैधानिक अनुमति और जांच के तैयार कर लिए गए।

 बिना अनुमति कैसे बने दानपत्र के दस्तावेज?
सूत्रों के अनुसार जिस भूमि पर दानपत्र और वसीयत तैयार की गई, वह नगर निगम की लीज भूमि थी। लीज की शर्तों के अनुसार बिना निगम की अनुमति के संपत्ति का हस्तांतरण संभव नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि रजिस्ट्री ऑफिस ने दस्तावेजों की वैधता की जांच किए बिना कागजात कैसे तैयार कर दिए।

 24 घंटे का नोटिस, कोई नहीं पहुंचा दावा करने
निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देश पर उपायुक्त शिवांगी महाजन ने मौके पर नोटिस चस्पा कर संबंधित पक्षों को 24 घंटे के भीतर दावा प्रस्तुत करने का अवसर दिया था।समय सीमा पूरी होने के बावजूद न तो कोई आपत्ति दर्ज कराई गई और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। इसके बाद जांच रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंप दी गई है।

 लीज शर्तों का उल्लंघन उजागर
नगर निगम सूत्रों के मुताबिक—प्लॉट क्रमांक 51, राइट टाउन (क्षेत्रफल 25,047 वर्गफीट) लीज पर था।वर्ष 2020-21 से लीज भू-भाड़ा जमा नहीं किया गया।लीज की शर्त क्रमांक 3, 6, 7 और 8 का उल्लंघन पाया गया।शर्त क्रमांक 6 के तहत निगम को जमीन पर पुनः प्रवेश का अधिकार सुरक्षित है।

 निगम जल्द ले सकता है कब्जा
निगमायुक्त का कहना है कि लीज भूमि को दानपत्र व वसीयत के माध्यम से हस्तांतरित करने की कोई अनुमति नहीं ली गई, जो स्पष्ट रूप से शर्तों का उल्लंघन है। जांच रिपोर्ट के आधार पर लीज निरस्त कर जमीन को निगम के अधिपत्य में लेने की तैयारी है।

 क्या था पूरा मामला?
डॉ. हेमलता के पति और पुत्र के निधन के बाद लगभग 11 हजार वर्गफीट भूमि का हिस्सा डॉ. सुमित जैन और प्राची जैन को दानपत्र के माध्यम से दिया गया था, जबकि करीब 14 हजार वर्गफीट भूमि एक धार्मिक संस्था के नाम वसीयत की गई थी। इसी को लेकर विवाद गहराया।डॉ. हेमलता के निधन के बाद जिला प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर संपत्ति को सील कर दिया था।

 अब जांच के घेरे में रजिस्ट्री कार्यालय
इस पूरे घटनाक्रम में अब यह बड़ा सवाल है कि क्या दस्तावेजों की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई? यदि ऐसा है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।करोड़ों की जमीन का यह विवाद अब प्रशासनिक जांच और कानूनी कार्रवाई की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।