जबलपुर। शहर के नर्मदा रोड स्थित जॉनसन प्राइवेट स्कूल में फीस नहीं जमा होने के कारण 10वीं कक्षा की एक आदिवासी छात्रा को बोर्ड परीक्षा में बैठने से रोक दिए जाने का मामला सामने आया है। घटना मंगलवार की बताई जा रही है, जब छात्रा अंग्रेजी विषय का प्रश्नपत्र देने विद्यालय पहुंची थी। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बकाया फीस का हवाला देते हुए उसे परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया और पहले पूरी फीस जमा करने की शर्त रख दी।

कमजोर आर्थिक स्थिति बनी वजह

जानकारी के अनुसार सानिया उइके 10वीं कक्षा की नियमित छात्रा है और बोर्ड परीक्षा दे रही है। मंगलवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उसका अंग्रेजी का पेपर था। छात्रा समय पर विद्यालय पहुंची और प्रवेश पत्र के साथ परीक्षा में शामिल करने की गुहार लगाई। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक शेष फीस जमा नहीं की जाएगी, उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

छात्रा की गुहार नहीं सुनी

छात्रा का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और कुछ फीस शेष है, जिसे वह अन्य विषयों की परीक्षाओं के दौरान या बाद में जमा कर देगी। उसने प्रबंधन से अनुरोध किया कि उसे कम से कम अंग्रेजी की परीक्षा देने दी जाए ताकि उसका एक वर्ष खराब न हो। बावजूद इसके, विद्यालय प्रशासन ने उसकी एक नहीं सुनी और उसे वापस लौटा दिया।

आक्रोशित परिजनों ने किया विरोध प्रदर्शन

परीक्षा से वंचित किए जाने की जानकारी मिलते ही छात्रा के परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे। उन्होंने विद्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। परिजनों का आरोप है कि आर्थिक तंगी का लाभ उठाकर स्कूल प्रबंधन बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। उनका कहना है कि फीस वसूली का यह तरीका न केवल अमानवीय है, बल्कि शिक्षा के अधिकार के भी खिलाफ है।

शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग

घटना की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक भी पहुंचने की बात कही जा रही है। परिजन दोषी प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई और छात्रा को पुनः परीक्षा में बैठाने की मांग कर रहे हैं। वहीं इस मामले ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और फीस वसूली के तौर-तरीकों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।