शर्म करो स्वास्थ्य विभाग के ठेकेदार, सीएमएचओ दफ्तर में छलका बुजुर्ग का दर्द, “मेरा पैर लौटा दो” कहकर रो पड़ी
जबलपुर।जिले का स्वास्थ्य महकमे ने पैसों के आगे बेशर्मी की चादर ओढ़ ली है, लूट-खसूट वाले अस्पतालों में गलत इलाज की वजह से किसी की मौत हो या पैर-हाथ कटे इससे विभाग के सीएमएचओ को कोई लेना-देना नहीं है। सीएमएचओ आफिस में मंगलवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिससे सबकी आंखें भर आई, एक 70 साल की बुजुर्ग एक पैर से न्याय के लिए सीएमएचओ कार्यालय पहंुची लेकिन उसे न्याय नहीं मिला तो वह फफक-फफक रोने लगी। जिले के स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मंगलवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला। करीब 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला एक पैर के सहारे न्याय की गुहार लगाने पहुंची, लेकिन जब उसे ठोस आश्वासन नहीं मिला तो वह वहीं फफक-फफक कर रोने लगी। इस दृश्य को देखकर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
दुर्घटना के बाद निजी अस्पताल ले जाने का आरोप
समाजवादी पार्टी के नेता आशीष मिश्रा के साथ झांसीघाट निवासी सुकून बाई अपनी शिकायत लेकर सीएमएचओ कार्यालय पहुंची थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ माह पूर्व सड़क दुर्घटना में उनके पैर में गंभीर चोट आई थी। परिजन उन्हें एंबुलेंस से शासकीय मेडिकल अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में स्वयं को डॉक्टर बताने वाले अमित खरे मिले, जो स्मार्ट सिटी अस्पताल के संचालक बताए जाते हैं। आरोप है कि उन्होंने मरीज को अपने निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए समझाया और मेडिकल अस्पताल ले जाने के बजाय अपने अस्पताल ले गए।
महीनों इलाज के बाद बिगड़ी हालत, काटना पड़ा पैर
बुजुर्ग महिला का कहना है कि स्मार्ट सिटी अस्पताल में कई महीनों तक इलाज चलता रहा। परिवार ने अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि बाद में अचानक इलाज बंद कर दिया गया और उचित देखभाल नहीं मिलने से घाव बिगड़ता गया। हालत इतनी गंभीर हो गई कि संक्रमण फैल गया और अंततः दूसरे अस्पताल में उनका एक पैर काटना पड़ा।
पॉलीथिन बांधकर सड़ाया गया पैर, परिजनों का आरोप
इसी अस्पताल को लेकर एक अन्य मामला भी सामने आया है। झांसीघाट निवासी बसंती बर्मन सड़क दुर्घटना में घायल हुई थीं। परिजनों का आरोप है कि स्मार्ट सिटी अस्पताल में उनके घायल पैर पर उचित चिकित्सा देने के बजाय लापरवाही बरती गई। आरोप यह भी है कि अस्पताल संचालक के निर्देश पर पैर पर पॉलीथिन बांध दिया गया, जिससे संक्रमण बढ़ा और कुछ दिनों बाद उनका भी पैर काटना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
इन आरोपों से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। पीड़ितों का कहना है कि निजी अस्पतालों की मनमानी और कथित लापरवाही के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सीएमएचओ कार्यालय में बुजुर्ग महिला ने रोते हुए न्याय की गुहार लगाई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही, उन्होंने अपने इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर दोषी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है।
मामले ने शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और निजी अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन गंभीर आरोपों की जांच कर पीड़ितों को न्याय दिला पाता है या नहीं।
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