जबलपुर। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले की कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए इस प्रकरण को वापस इंदौर खंडपीठ स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।
​चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि चूंकि धार जिला भौगोलिक रूप से इंदौर खंडपीठ के अंतर्गत आता है, इसलिए नियमानुसार इसकी सुनवाई वहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं कि प्रकरण से संबंधित समस्त दस्तावेज तत्काल इंदौर भेजे जाएं। इससे पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जबलपुर मुख्य पीठ में सूचीबद्ध हुआ था।

एएसआई की 98 दिवसीय सर्वे रिपोर्ट पर टिकी नजरें
​सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत को बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की 98 दिनों की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट वर्तमान में हाईकोर्ट की सुरक्षा में है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, इस सीलबंद रिपोर्ट को अब खुली अदालत में खोला जाना है, ताकि सभी पक्षकार इस पर अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत कर सकें।
​ 23 फरवरी को इंदौर हाईकोर्ट में होगी अहम सुनवाई
​अब इस बहुचर्चित मामले का अगला पड़ाव 23 फरवरी 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में होगा। इस दिन बड़ी बेंच के समक्ष एएसआई की गोपनीय रिपोर्ट को अनसील किए जाने की प्रबल संभावना है। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह सुनवाई भोजशाला विवाद की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।