जबलपुर। प्रदेश के करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों को बड़ी राहत देते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा जारी “ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025” के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आगामी आदेश तक मार्गदर्शिका के प्रावधान लागू नहीं किए जाएंगे तथा किसी भी ग्राम रोजगार सहायक का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गोपेश्वर यश तिवारी  के द्वारा दलील दी गई कि नई मार्गदर्शिका में सेवा शर्तों, स्थानांतरण प्रक्रिया और कार्यप्रणाली से जुड़े कई ऐसे प्रावधान शामिल हैं, जिनसे बड़ी संख्या में रोजगार सहायकों की सेवा स्थिरता प्रभावित हो सकती है। यह भी कहा गया कि बिना पर्याप्त परामर्श और स्पष्ट नीति ढांचे के मार्गदर्शिका लागू करना कर्मचारियों के अधिकारों के विपरीत है।

प्राथमिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही निर्देशित किया है कि चार सप्ताह तक यथास्थिति बनाए रखी जाए। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई, विशेष रूप से स्थानांतरण, नहीं की जाएगी।

इस अंतरिम आदेश के बाद प्रदेशभर के ग्राम रोजगार सहायकों में राहत का माहौल है। कई जिलों में स्थानांतरण और नई व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसे लेकर कर्मचारी संगठनों ने न्यायालय की शरण ली थी।

अब यह मामला चार सप्ताह बाद पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगा। उस दौरान राज्य सरकार अपना पक्ष प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद कोर्ट मार्गदर्शिका के प्रावधानों पर अंतिम निर्णय की दिशा तय करेगा। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश से रोजगार सहायकों को अस्थायी राहत मिल गई है और उनकी सेवा स्थिति पूर्ववत बनी रहेगी।