जबलपुर। प्रदेश में इन दिनों कक्षा 5वीं और 8वीं के साथ-साथ 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के मूल्यांकन कार्य को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शिक्षकों का आरोप है कि लगातार दो सप्ताह से उन्हें बिना अवकाश दिए मूल्यांकन कार्य कराया जा रहा है, जिससे वे मानसिक और शारीरिक दबाव महसूस कर रहे हैं।


लगातार मूल्यांकन कार्य, अवकाश नहीं

शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा मूल्यांकन कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके चलते कई स्कूलों और मूल्यांकन केंद्रों पर शिक्षकों को लगातार ड्यूटी करनी पड़ रही है। दो सप्ताह से अधिक समय से उन्हें एक दिन का भी अवकाश नहीं दिया गया है, जिससे परिवार के साथ समय बिताने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।


ऑनलाइन उपस्थिति नहीं लगने से बढ़ी चिंता

मूल्यांकन कार्य के दौरान शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति भी दर्ज नहीं हो रही है। ऐसे में शिक्षकों को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं भविष्य में अनुपस्थित दिखाकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई न कर दी जाए। शिक्षकों का कहना है कि जब उनसे नियमित रूप से काम लिया जा रहा है तो उनकी उपस्थिति भी दर्ज की जानी चाहिए।


श्रम नियमों के उल्लंघन का आरोप

शिक्षकों का आरोप है कि लगातार बिना अवकाश काम लेना श्रम नियमों के विरुद्ध है। उनका कहना है कि किसी भी कर्मचारी से लगातार काम नहीं लिया जा सकता और उसे सप्ताह में कम से कम एक दिन का अवकाश मिलना चाहिए।


मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग

शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मूल्यांकन कार्य के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए। सप्ताह में कम से कम एक दिन का अवकाश दिया जाए, ताकि शिक्षक अपने परिवार को समय दे सकें और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रह सकें।

शिक्षकों का कहना है कि यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो शिक्षकों में असंतोष और बढ़ सकता है।