जबलपुर। शहर सहित पूरे प्रदेश में अब 15 साल पुरानी कमर्शियल बसों का संचालन बंद होने की दिशा साफ हो गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर मुहर लगाते हुए बस ऑपरेटरों की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

बस ऑपरेटरों को झटका, याचिका खारिज
हाईकोर्ट में बस ऑपरेटरों द्वारा दायर याचिका में 15 साल पुरानी बसों को हटाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। हालांकि कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि सरकार द्वारा लिया गया निर्णय वैध और कानून सम्मत है।

 14 नवंबर 2025 को जारी हुआ था आदेश
राज्य शासन ने 14 नवंबर 2025 को आदेश जारी कर 15 वर्ष से अधिक पुरानी कमर्शियल बसों को सड़कों से हटाने के निर्देश दिए थे। इस आदेश का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ाना और प्रदूषण पर नियंत्रण करना बताया गया था।

 परिवहन नीति बनाना सरकार का अधिकार
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार को परिवहन नीति बनाने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने माना कि सार्वजनिक हित में लिए गए ऐसे निर्णयों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता, जब तक वे कानून के दायरे में हों।

 सुरक्षा और प्रदूषण पर फोकस
विशेषज्ञों के अनुसार पुरानी बसों के हटने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ ही प्रदूषण स्तर पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। नई तकनीक वाली बसों के आने से यात्रियों को भी बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

 परिवहन क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव
इस फैसले के बाद प्रदेशभर में पुरानी बसों के संचालन पर प्रभाव पड़ेगा। बस ऑपरेटरों को अब नई बसें लाने या वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत होगी। हाईकोर्ट के इस फैसले को परिवहन व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में साफ नजर आएगा।