'साहब, घर में चूल्हा जलना मुश्किल है': वेतन के लिए तरस रहे ग्वालियर के स्वास्थ्य कर्मी
ग्वालियर : मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए घर चलाना दूभर हो गया है। सबसे खराब स्थिति ग्वालियर जिले की है, जहाँ स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब 'मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स कर्मचारी संघ' ने सीधे राज्यपाल मंगुभाई पटेल का दरवाजा खटखटाया है।
एजेंसियों की मनमानी और आर्थिक तंगी
कर्मचारी संघ ने राज्यपाल को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ग्वालियर के अधीन काम करने वाली सनशाइन सिक्योरिटी और अन्य अनुबंधित एजेंसियां भुगतान में जानबूझकर देरी कर रही हैं। 90 दिनों से मानदेय न मिलने के कारण कर्मचारी और उनके परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।
इन अस्पतालों में चरमराई व्यवस्था
वेतन न मिलने की समस्या किसी एक केंद्र तक सीमित नहीं है। प्रभावित केंद्रों की सूची लंबी है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
सिविल अस्पताल: डबरा और हजीरा।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC): बिलौआ और भितरवार।
डिस्पेंसरी: जनकगंज और माधवगंज।
अन्य केंद्र: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछोर, मोहनगढ़, शुक्लहारी और विभिन्न उप-स्वास्थ्य केंद्र (बीजकपुर, जौरासी, सालबई आदि)।
भोपाल में 'आर-पार' की जंग की तैयारी
कर्मचारियों का कहना है कि वे स्थानीय अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला से हस्तक्षेप की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही वेतन जारी नहीं हुआ, तो कर्मचारी भोपाल में भूख हड़ताल और आमरण अनशन शुरू करेंगे।
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