—एजेंसियों की पकड़ से दूर कैसे
जबलपुर। शहर में कभी छोटा-मोटा कारोबार करने वाला कथित सट्टा कारोबारी सतीश सनपाल आज दुबई की चमक-दमक के बीच “बड़े उद्योगपति” की छवि के साथ चर्चा में है। लेकिन जबलपुर के ओमती, लार्डगंज, कोतवाली और मदनमहल थानों में दर्ज नौ आपराधिक मामले, ई-कोर्ट में सक्रिय दो प्रकरण और आव्रजन ब्यूरो का लुक आउट सर्कुलर—इन सबके बीच उसकी आलीशान जिंदगी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

आपराधिक प्रकरण और अदालती रिकॉर्ड

अदालती रिकॉर्ड में जिन मामलों की पुष्टि होती है, उनमें आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और सार्वजनिक जुआ अधिनियम 4ए के तहत दर्ज प्रकरण शामिल बताए जाते हैं। ओमती और मदनमहल थानों में 2022 के एफआईआर नंबरों के साथ सक्रिय सीएनआर प्रविष्टियां भी सामने आई हैं। सीजन आर एमपी 2001016 044 2023 एफआई आर 27 1/ 2022 ओमती पुलिस स्टेशन आईपीसी 120बी और सार्वजनिक जुआ अधिनियम 4ए। दूसरा मामला सीएनआर 20010 295312 024 एफआई आर 17 0/ 2022 मदन महल पुलिस स्टेशन में सार्वजनिक जुआ अधिनियम 4ए के अंतर्गत मामला दर्ज है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सट्टेबाजी और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों की जांच समय-समय पर आगे बढ़ाई जाती रही है।

1000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का दावा

जांच एजेंसियों के सूत्रों का आरोप है कि 12 कथित फर्जी कंपनियों के जरिए करीब 1000 करोड़ रुपये की रकम हवाला चैनलों से बाहर भेजी गई। दावा है कि ये कंपनियां अनजान नागरिकों के नाम पर पंजीकृत थीं और अवैध सट्टेबाजी से अर्जित रकम को विदेशी खातों तक पहुंचाने में इस्तेमाल हुईं। आरोप यह भी है कि एक डिजिटल/डार्क वेब आधारित सट्टेबाजी एक्सचेंज से जुड़े नेटवर्क ने युवाओं को निशाना बनाया। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

दुबई की शान-ओ-शौकत

सनपाल के बारे में सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाता है कि वह दुबई हिल्स में लगभग 50 हजार वर्गफुट के विला का मालिक है और कई रोल्स-रॉयस कारें रखता है। नवजात बेटी को कस्टमाइज्ड रोल्स-रॉयस उपहार देने और पत्नी को हर वर्ष 3 किलो सोना खरीदकर देने जैसे दावों ने भी सुर्खियां बटोरीं। बताया जाता है कि उसने दुबई में एएनएक्स नामक होल्डिंग कंपनी के जरिए रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज में कारोबार फैलाया है।


छवि सुधार या नया मंच?
इन दिनों वह दुबई-आधारित अमीर भारतीयों पर बने एक रियलिटी शो में नजर आने की वजह से भी चर्चा में है। ट्रेलर में हाई-प्रोफाइल जीवनशैली की झलक दिखाई गई है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रयास छवि सुधार का हिस्सा हो सकता है, ताकि सफलता की कहानी के नीचे आपराधिक रिकॉर्ड की चर्चा दब जाए। वहीं समर्थक इसे एक उद्यमी की अंतरराष्ट्रीय पहचान बताते हैं।

एजेंसियों पर सवाल
बड़ा प्रश्न यह है कि यदि एफआईआर और लुक आउट अलर्ट मौजूद हैं, तो प्रत्यर्पण, रेड कॉर्नर नोटिस या पीएमएलए/फेमा के तहत संपत्ति फ्रीज जैसी कार्रवाइयों की दिशा में ठोस प्रगति क्यों नहीं दिखती? अधिकारी अधिकार-क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं की जटिलता का हवाला देते हैं, जबकि आलोचक अंतर-एजेंसी समन्वय की कमी और नौकरशाही सुस्ती को वजह मानते हैं।

जांच एजेंसियों के लिए चुनौती
डिजिटल सट्टेबाजी के जाल में फंसे कथित पीड़ितों का कहना है कि उनकी बचत, परिवार और भविष्य पर इसका असर पड़ा। उनके लिए यह कहानी ग्लैमर नहीं, बल्कि नुकसान और संघर्ष की है।जबलपुर की गलियों से दुबई की गगनचुंबी इमारतों तक का यह सफर सिर्फ “सफलता” की दास्तान है या जांच एजेंसियों के लिए चुनौती—यह तय होना बाकी है। फिलहाल, एक ओर दुबई की चमक है, दूसरी ओर जबलपुर की एफआईआर; और इन दोनों के बीच सच की पूरी तस्वीर सामने आना अभी बाकी है।

जबलपुर में एक गुर्गा घूमकर मीडिया मैनेज कर रहा
सूत्रों का कहना है कि सतीश सनपाल का एक गुर्गा इन दिनों में शहर है और वह मीडिया के कार्यालयांे में जाकर खबरों को लेकर मैनेज कर रहा है। किसी भी अखबार में एक दिन न्यूज छपने के बाद दोबारा सतीश सनपाल के खिलाफ खबरें नहीं छपती है। चर्चा तो ये भी है कि शहर के किसी नामी व्यक्ति को गुर्गें ने एक आयोजन के लिए अच्छी-खासी रकम भी दी है। हालांकि गुर्गा शहर से जुड़ा हुआ है और राजनीतिक पकड़ परिवार की होने के कारण पुलिस अब तक उस तक नहीं पहंुच पाई है।