पांच साल की दूरियां खत्म, जज की पहल से एक हुए पति-पत्नी

 


जबलपुर, – रिश्ते में आई दरार को गलतफहमियां किस तरह बढ़ा देती हैं, इसका एक उदाहरण जबलपुर के कुटुंब न्यायालय में देखने को मिला। पिछले पांच सालों से अलग रह रहे एक दंपति ने आखिरकार अपने गिले-शिकवे भुलाकर फिर से एक होने का फैसला किया। यह संभव हुआ तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मुकेश कुमार दांगी की मानवीय पहल और समझाइश से।

क्या था मामला?

गोंदिया निवासी डब्लू मंगल और जबलपुर निवासी बबीता उर्फ शारदा के बीच पांच साल पहले किसी बात को लेकर गलतफहमी हो गई थी। इस गलतफहमी ने उनके रिश्ते को इतना कमजोर कर दिया कि दोनों अलग-अलग रहने लगे। उनका मामला कुटुंब न्यायालय में लंबित था, जहां वे कानूनी रूप से अलग होने की प्रक्रिया में थे।

जज ने निभाई सुलहकार की भूमिका

आज, 13 सितंबर 2025 को न्यायाधीश मुकेश कुमार दांगी की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। जज दांगी ने दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक सुना और उन्हें समझाया कि रिश्ता विश्वास और सामंजस्य पर टिका होता है। उनकी समझाइश ने पति-पत्नी को अपने पुराने मतभेदों को भुलाने और एक नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।

दोनों ने जज के सामने ही एक-दूसरे को माला पहनाई और हमेशा साथ रहने का वादा किया। इस भावुक क्षण को देखकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए।

जज ने दी मिठाई और राशि

इस फैसले की सबसे खास बात यह रही कि जज साहब ने स्वयं अपनी जेब से दोनों को मिठाई खाने के लिए कुछ राशि भी प्रदान की। यह एक ऐसा कदम था जिसने कानूनी प्रक्रिया को मानवीय स्पर्श दिया। दंपति ने खुशी-खुशी इस पेशकश को स्वीकार किया और अपने घर लौट गए। इस मामले की पैरवी एडवोकेट अभिषेक सोनी और डॉली सोनी ने की।

यह घटना दर्शाती है कि कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ सही मार्गदर्शन और मानवीय संवेदनाएं भी बिखरे हुए रिश्तों को फिर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।