मुक्तिधाम में रुका अंतिम संस्कार:  लावारिस व्यक्ति के परिजन अचानक पहुंचे

जबलपुर। गढ़ा के चौहानी मुक्तिधाम में रविवार का दिन एक अविश्वसनीय घटना का गवाह बना। जिस शव को रांझी पुलिस लावारिस मानकर अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थी, अचानक उसके परिजन वहां पहुंच गए और दावा किया कि यह शव उनके परिवार के सदस्य का है। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस अधिकारियों को बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति को स्तब्ध कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह घटना घमापुर के गोपाल होटल निवासी 50 वर्षीय संतोष पटेल से जुड़ी है। कुछ दिनों पहले एक सड़क हादसे में संतोष गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। चूंकि, संतोष की पहचान तुरंत नहीं हो पाई, इसलिए पुलिस ने नियमानुसार शव का पंचनामा किया और उसे लावारिस मानकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी।

परिजनों तक कैसे पहुंची खबर?

संतोष पटेल रोज़ की तरह बच्चों को स्कूल छोड़ने गए थे, लेकिन जब देर तक वापस नहीं लौटे तो परिवार को चिंता होने लगी। उन्होंने सोचा कि शायद किसी काम से उन्हें बाहर रुकना पड़ा होगा, लेकिन जब रात भी बीत गई और संतोष का कोई पता नहीं चला, तो परिवार बेचौन हो उठा। सुबह होते ही वे उनकी तलाश में जुट गए। इसी दौरान, परिवार के एक सदस्य ने फेसबुक पर सड़क हादसे से जुड़ी एक खबर देखी, जिसमें मृतक की तस्वीर भी थी। तस्वीर देखते ही परिवार के पैरों तले से जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत पहचान लिया कि यह शव संतोष का ही है। खबर में यह भी बताया गया था कि पुलिस शव का अंतिम संस्कार चौहानी मुक्तिधाम में करने वाली है।

मुक्तिधाम का भावुक दृश्य

जानकारी मिलते ही परिवार के सभी सदस्य तुरंत मुक्तिधाम की ओर भागे। जब वे वहां पहुंचे, तो पुलिस अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने ही वाली थी। परिजनों ने रोते-बिलखते हुए पुलिस से शव सौंपने का आग्रह किया। उन्होंने पुलिस को बताया कि शव लावारिस नहीं है, बल्कि उनके परिवार का है। परिजनों की बातों पर पुलिस ने तत्काल जांच-पड़ताल की। उनके द्वारा दिए गए पहचान पत्र और अन्य सबूतों से यह पुष्टि हुई कि मृतक वास्तव में संतोष पटेल ही हैं।

पुलिस ने सौंपा शव

जांच पूरी होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने शव परिजनों को सौंप दिया। इस दौरान मुक्तिधाम में बेहद भावुक दृश्य था। जिस संतोष को परिजन लापता समझ रहे थे, आज उनका अंतिम संस्कार पुलिस द्वारा लावारिस के रूप में किया जाने वाला था, लेकिन समय रहते खबर मिलने से वे पहुंच गए। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि यदि समय पर संतोष की पहचान कर ली जाती तो परिवार को इस तरह की पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता। हालांकि, यह घटना एक दुखद कहानी में एक सुखद मोड़ भी लेकर आई, जहां परिवार को कम से कम अंतिम विदाई देने का मौका मिल गया।