जबलपुर। नगर निगम की जनसुनवाई में मंगलवार को 'अधिकारी और जनता' के बीच की दूरी कम होती दिखी। जबलपुर नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार ने अपनी जनसुनवाई के तरीके में एक ऐसा सकारात्मक बदलाव किया, जिसने न केवल आवेदकों को सम्मान दिया, बल्कि सरकारी तंत्र के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ाया। उनकी इस अनूठी पहल ने वर्षों पुरानी प्रशासनिक प्रक्रिया को एक मानवीय स्पर्श प्रदान किया है।

 

'पहले बैठिए' का नया प्रोटोकॉल

 

जनसुनवाई में अक्सर देखा जाता है कि आवेदक घंटों इंतजार करने के बाद एक अधिकारी के सामने खड़े होकर अपनी समस्याएं बताते हैं। लेकिन मंगलवार को यह नजारा पूरी तरह बदल गया। कमिश्नर अहिरवार ने जनसुनवाई में पहुंचने वाले हर आवेदक को बुलाकर, बैठाकर और पूरे सम्मान के साथ बात करते हुए समस्याओं को सुना।

कमिश्नर ने आवेदकों से आग्रह किया कि वे सहज होकर पहले बैठें और फिर अपनी बात रखें। उन्होंने कहा, "पहले आइए, बैठिए, अभी आपका काम होगा।" यह सुनकर कई आवेदक थोड़ा असहज और अचंभित हुए, क्योंकि उन्हें इस तरह के सम्मान की आदत नहीं थी। हालांकि, कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि अब जनसुनवाई में लोगों की समस्या इसी 'सम्मान और समाधान' की तर्ज पर सुनी जाएगी।

 

समर्पण और संवेदनशीलता का उदाहरण

 

इस पहल ने दिखाया कि कमिश्नर अहिरवार का जोर केवल समस्याओं के निपटारे पर नहीं, बल्कि आवेदकों के आत्म-सम्मान को बनाए रखने पर भी है। एक अधिकारी के अंदर जन समस्याओं को सुनने का ऐसा समर्पण अरसे बाद देखने को मिला है। यह कार्यशैली स्पष्ट करती है कि जनता की सेवा ही उनका मूल लक्ष्य है।

 

पुरानी शैली को नया आयाम

 

जनसुनवाई को अक्सर औपचारिक और बोझिल माना जाता है। कमिश्नर की यह पहल इस रूढ़िवादिता को तोड़ती है और सरकारी कार्यालयों को जनोन्मुखी केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ऐसा माना जा रहा है कि यह नई कार्यप्रणाली अन्य विभागों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगी, जहाँ नागरिकों को सम्मान और सहजता के साथ उनकी समस्याओं का समाधान मिल सके।जनता की समस्याओं के प्रति इस सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार की जमकर तारीफ हो रही है। यह पहल प्रशासन और जनता के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।