खगोलविदों ने ब्रह्मांड में खोजा दुर्लभ स्टार सिस्टम
वाशिंगटन । ब्रह्मांड में एक ऐसा अद्भुत और दुर्लभ स्टार सिस्टम खोजने का दावा खगोलविदों ने किया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। यह अनोखा सिस्टम पृथ्वी से करीब 82 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। खगोलविदों ने इसे यूपीएम जे1040−3551 आबबाब नाम दिया गया है। यह पहला ऐसा ज्ञात क्वाड्रपल सिस्टम है जिसमें दो युवा रेड ड्वार्फ स्टार्स और उनके चारों ओर घूमते दो ब्राउन ड्वार्फ्स शामिल हैं। यह खोज न केवल खगोलशास्त्र की दिशा बदल सकती है, बल्कि ब्राउन ड्वार्फ्स यानी तथाकथित ‘फेल्ड स्टार्स’ के रहस्यों को सुलझाने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ब्राउन ड्वार्फ्स खगोल विज्ञान की दुनिया में सबसे रहस्यमयी पिंड माने जाते हैं। इन्हें असली तारा नहीं माना जाता क्योंकि इनमें इतना द्रव्यमान नहीं होता कि वे हाइड्रोजन को हीलियम में बदलने वाली न्यूक्लियर फ्यूज़न प्रक्रिया शुरू कर सकें। यही कारण है कि इन्हें अक्सर ‘नकली तारे’ या ‘अधूरे तारे’ कहा जाता है। वे उम्र के साथ धीरे-धीरे ठंडे होते जाते हैं, और वैज्ञानिक अब तक इनके सही विकासक्रम को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इस सिस्टम में दो रेड ड्वार्फ्स और दो ब्राउन ड्वार्फ्स अलग-अलग जोड़ियों में हैं।
दोनों जोड़ियां अपने-अपने परिक्रमण चक्र में तो कुछ दशकों में घूम जाती हैं, लेकिन दोनों मिलकर एक बड़े कॉमन सेंटर ऑफ मास की परिक्रमा करने में एक लाख साल से भी अधिक समय लेती हैं। इसे एक ब्रह्मांडीय नृत्य की तरह समझा जा सकता है, जहां चार पिंड अद्भुत तालमेल में घूम रहे हों। ये तारे इतने धुंधले हैं कि नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते। रेड ड्वार्फ्स को करीब 1.5 प्रकाश-वर्ष दूरी तक लाकर देखा जा सकता है, जबकि ब्राउन ड्वार्फ्स तो 1,000 गुना ज्यादा धुंधले होते हैं और केवल इन्फ्रारेड तकनीक में ही दिखाई देते हैं। इस खोज के पीछे ईएसए के गाइया स्पेसक्राफ्ट और नासा के वाइज मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी मदद से वैज्ञानिकों ने इन सितारों की गति और स्थिति का पता लगाया।
इस खोज की सबसे खास बात यह है कि यह सिस्टम वैज्ञानिकों को ब्राउन ड्वार्फ्स की उम्र, द्रव्यमान, तापमान और संरचना का सटीक अध्ययन करने का मौका देगा। जहां रेड ड्वार्फ्स का तापमान लगभग 2,900 डिग्री सेल्सियस है, वहीं ब्राउन ड्वार्फ्स का तापमान 420 से 550 डिग्री सेल्सियस तक पाया गया है। पहली बार ऐसा सिस्टम मिला है जिसमें दो T-टाइप ब्राउन ड्वार्फ्स, दो रेड ड्वार्फ्स की परिक्रमा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग तकनीक से इन ब्राउन ड्वार्फ्स का द्रव्यमान और गति और भी सटीक रूप से मापी जा सकेगी।
IND vs SA: मोर्कल ने वानखेड़े और मोटेरा की पिच का बचाव किया, बोले- क्यूरेटर ने सर्वश्रेष्ठ विकेट तैयार किया
IND vs SA: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच से पहले बढ़ी भारत की चिंता, हार्दिक के शॉट पर घायल हुआ ये तेज गेंदबाज
दिल्ली को दहलाने की साजिश नाकाम, लश्कर-ए-तैयबा के निशाने पर लाल किला
सपनों पर सियासत का वार: बांग्लादेश के विश्वकप बहिष्कार पर फूटा कोच का गुस्सा, आसिफ नजरुल को ठहराया जिम्मेदार
छतों पर बिना लाइसेंस होर्डिंग पर रोक, नई प्रचार नियमावली लागू
पीएम मोदी के आगमन से पहले बयानबाज़ी तेज, गहलोत ने रिफाइनरी प्रोजेक्ट और पंचायत चुनाव को बनाया मुद्दा
अमेरिकी टैरिफ दर में भारत को बड़ी राहत, 18 से घटकर अब 10 प्रतिशत हुआ टैरिफ