लापता लोगों की तलाश के लिए सेना और एनडीआरएफ का सर्च अभियान जारी

जबलपुर। बरगी डैम में हुए दर्दनाक हादसे के बाद बचाव अभियान और पीड़ितों के परिजनों को मदद पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है। हादसे के बाद से लापता लोगों की तलाश के लिए सेना और एनडीआरएफ की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से की गई एक शर्त के कारण पीड़ित परिवार और उनके सहयोगियों में भारी नाराजगी फैल गई थी, जिसे बाद में स्थानीय कर्मचारियों के विरोध के बाद सुलझा लिया गया है।
​खराब मौसम से रेस्क्यू में आ रही बाधा
​बरगी डैम में गुरुवार को हुए हादसे के बाद लापता 4 लोगों की तलाश के लिए शनिवार सुबह 7 बजे से सर्च ऑपरेशन फिर से शुरू किया गया। बचाव कार्य में सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें नौकाओं की मदद से लापता लोगों को खोज रही हैं। डैम के इलाके में चल रही तेज हवा और उठ रही ऊंची लहरों के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तेज हवा के बीच छोटी नावों का संचालन बहुत जोखिम भरा है, जिसके कारण बचाव अभियान को बीच-बीच में कुछ समय के लिए रोकना पड़ता है।
​लापता लोगों की तलाश में जुटी टीमें
​हादसे में आयुध निर्माणी खमरिया के A 3 सेक्शन में कार्यरत कामराज आर्य का परिवार शामिल था। कामराज कुल 15 सदस्यों के साथ घूमने पहुंचे थे। उनके माता-पिता डैम के किनारे बैठे थे, जबकि कामराज की पत्नी, भाभी और बच्चे क्रूज में सवार थे। हादसे के दौरान 10 वर्षीय बेटा लहरों के सहारे किनारे आ गया था, जिसे जल निगम के कर्मचारियों ने सुरक्षित बचा लिया। हादसे में कामराज की 38 वर्षीय पत्नी काकुलाझी और 42 वर्षीय सौभाग्यम अलागन के शव बरामद कर लिए गए हैं। वहीं, 45 वर्षीय कामराज, 5 वर्षीय श्रीतमिलवेंदन और 9 वर्षीय मयूरन सहित 4 लोग अभी भी लापता हैं।
​पीड़ित परिवार और प्रशासन के बीच विवाद
​मृतकों के शवों को उनके गृह ग्राम तमिलनाडु के त्रिची भेजने को लेकर प्रशासन ने पहले असमंजस की स्थिति बना ली थी। प्रशासन ने शर्त रखी थी कि शव के साथ केवल परिवार का 1 ही व्यक्ति जा सकता है और शेष सदस्यों को अपने टिकट खुद बुक करने होंगे। कामराज के साथी कर्मचारी अर्नब दास गुप्ता के अनुसार शव तेजी से खराब होने लगे हैं और पीड़ित परिवार के पास इतना खर्च उठाने के लिए आर्थिक साधन नहीं हैं। इस स्थिति पर ऑर्डनेंस फैक्ट्री के कर्मचारियों ने विरोध की चेतावनी दी थी। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया था कि यदि मदद नहीं की गई तो शवों को फैक्ट्री के गेट के सामने रखकर प्रदर्शन किया जाएगा।
​विमान से भेजे जाएंगे पार्थिव शरीर
​प्रशासन के इस रुख के बाद कर्मचारियों के विरोध की चेतावनी से अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थिति को भांपते हुए प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम रांझी ने पीड़ित परिवार से संपर्क किया। एसडीएम ने परिजनों को हवाई जहाज से तमिलनाडु भेजने का पूर्ण आश्वासन दिया है। शनिवार दोपहर को शवों को कोयंबटूर के रास्ते त्रिची भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा मदद के आश्वासन के बावजूद प्रशासन के इस नियम ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर हुए विरोध के बाद प्रशासन ने निर्णय बदल दिया और पीड़ितों की मदद का मार्ग प्रशस्त हुआ।