छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है, जहां अनुभाग परासिया में एक विशेष कफ सिरप के सेवन के बाद 10 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 अन्य बच्चे गंभीर स्थिति में नागपुर के अस्पताल में भर्ती हैं। प्रारंभिक जांच में कफ सिरप में प्रतिबंधित और जहरीले रसायन 'डाई ईथीलीन ग्लाइकोल' की भारी मात्रा पाई गई है, जिसके कारण बच्चों की किडनी फेल हो रही है।

 

 

 

विवरण संख्या/स्थिति
मृत बच्चों की संख्या (रिकॉर्ड पर) 10 (दिनांक 04.10.2025 तक)
उपचाररत बच्चे (नागपुर में) 6
बच्चों की सामान्य आयु 5 वर्ष के आसपास
मौत का कारण एक्यूट किडनी डिजीज (Acute Kidney Disease)
लापरवाही के आरोपी मुख्य डॉक्टर डॉ. प्रवीण सोनी, MBBS, DCH (शिशु रोग विशेषज्ञ, CHC परासिया)
दूषित रसायन डाई ईथीलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol - DEG)
DEG की मात्रा (जांच रिपोर्ट) 48.6% W/V (तमिलनाडु लैब) और 46.28% W/V (भोपाल लैब)
सिरप निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चर (नंबर 787)

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पूरी घटना का विवरण

 

छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में पिछले कुछ हफ्तों में छोटे बच्चों में सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत के बाद एक असामान्य पैटर्न देखने को मिला। अधिकांश बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परासिया में पदस्थ सरकारी चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी को दिखाया गया।

बच्चों को कफ सिरप और अन्य दवाएं दी गईं। इसके कुछ ही समय बाद, बच्चों में पेशाब रुकने (Anuria) की गंभीर शिकायत सामने आई। टेस्ट रिपोर्ट्स में बच्चों के सीरम क्रिएटिनिन और सीरम यूरिया का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ पाया गया, जो किडनी की समस्या का संकेत था। गंभीर हालत में बच्चों को नागपुर के अस्पतालों में रेफर किया गया।

4 सितंबर 2025 से 4 अक्टूबर 2025 के बीच, रिकॉर्ड पर 10 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिनमें शिवम राठौर, विधि-नमिता, अदनान, उसैद, रिषिका, हितांश सोनी, चंचलेश, विकास, संध्या और योगिता शामिल हैं।

 

किडनी बायोपसी में सामने आई सच्चाई

मृतक विकास यदुवंशी की जीएमसी नागपुर में 24 सितंबर 2025 को की गई किडनी बायोपसी रिपोर्ट में एक्यूट ट्यूबलर इंजरी (Acute Tubular Injury) पाई गई, जो दूषित पदार्थों के सेवन के कारण किडनी फेल होने का संकेत है।

 

कफ सिरप में जहर: लैब रिपोर्ट की पुष्टि

 

इस त्रासदी का मुख्य कारण उस कफ सिरप को माना जा रहा है जो बच्चों को दिया गया था। 4 अक्टूबर 2025 को प्राप्त हुई ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी, तमिलनाडु और शासकीय औषधि प्रयोगशाला, भोपाल की जांच रिपोर्टों ने इस आशंका को पुख्ता कर दिया है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, जांच के लिए भेजे गए सिरप के सैंपल में प्रतिबंधित और स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक रसायन 'डाई ईथीलीन ग्लाइकोल (DEG)' की मात्रा क्रमशः 48.6% और 46.28% पाई गई है।

  • यह मिलावटी पदार्थ 'डाई ईथीलीन ग्लाइकोल' एक्यूट किडनी फेलियर (Acute Kidney Failure) का कारण बन सकता है, जिसकी वजह से बच्चों की मौत हुई।

 

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई

सरकारी चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी पर लापरवाही से जहरीला सिरप लिखने का गंभीर आरोप है। कफ सिरप निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चर (नंबर 787) के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।